February 15, 2026

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लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार

नई दिल्ली। जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आरजेडी सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने और एफआईआर को रद्द किए जाने की मांग की थी, मगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि इस मामले में तेजी से सुनवाई करें। हालांकि लालू यादव की उम्र और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए ट्रायल के दौरान उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पेशी से राहत दे दी है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 मई को अपने आदेश में कहा था कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है। लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, बेटी हेमा यादव और मीसा भारती भी आरोपी हैं। सीबीआई ने लालू यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में पिछले साल 6 जुलाई को फाइनल चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में सीबीआई ने 78 आरोपियों का जिक्र किया था। इसके बाद ईडी ने 6 अगस्त 2024 को 100 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी।

जमीन के बदले नौकरी का यह मामला यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल साल 2004 से 2009 के बीच का है। उस समय लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियां निकाली गईं। इन नौकरियों में भर्ती के लिए युवाओं से उनकी पैतृक जमीन हस्तांतरित करा ली गई। ईडी का आरोप है कि जमीन हस्तांतरण के लिए एबी एक्सपोर्ट्स और एके इन्फोसिस्टम्स नाम की दो कंपनियों का इस्तेमाल हुआ। एके इन्फोसिस्टम्स ने 1.89 करोड़ में 11 भूखंड खरीदे और बाद में सिर्फ 1 लाख रुपए में एके इन्फोसिस्टम्स को ही लालू यादव के परिजनों के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।

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