February 15, 2026

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Pollution: नासा की लाइव फायर फोटो से साफ, प्रदूषण के जिम्मेदार पंजाब के किसान, न कि दिवाली के पटाखे

नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही बढ़ते प्रदूषण को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच जंग शुरू हो जाती है, लेकिन इस जंग के बीच समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कहीं से भी होती हुई नहीं दिखती है। ऐसे में आम जनता जहां बेहाल होती हैं, तो वही राजनीतिक दल सियासत चमकाने में मसरूफ रहते हैं। अभी पंजाब को ही देख लीजिए। कल तक केंद्र सरकार को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहरानी वाली पंजाब सरकार का झूठा चेहरा बेनकाब हो चुका है। दरअसल,नासा एक फोटो साझा की है, जिसमें राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की वजह न ही दिवाली में फोड़े जाने वाले पटाखे हैं, न ही राजधानी में संचालित होने वाली औद्योगिकी गतिविधियां हैं, बल्कि यहां बढ़ते प्रदूषण की वजह पंजाब के किसानों द्वारा जलाए जानी वाली पराली है। जिसका खायिमाजा दिल्ली की जनता को दमघोंटू हवा में सांस लेकर भुगतना पड़ रहा है।

एक आंक़ड़े के मुताबिक, विगत शुक्रवार को प्रदेश में 5 हजार से भी अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। गुरुवार को 3 हजार से भी अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों को देखकर यह साफ जाहिर होता है कि प्रदेश में पराली जलाने के मामले में 65 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। अब तक प्रदेश में 28 हजार से भी अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। अगर इसी तरह से प्रदेश में पराली जलाने मामले में इजाफा होता गया, तो इस बात में कोई दोमत नहीं है कि आने वाले स्थिति इस कदर गंभीर हो जाएगी कि आम जनता का सांस लेना मुहाल हो जाएगा।

किसानों का क्या कहना है

वहीं, अगर किसानों से ऐसा करने के पीछे की वजह जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने खुद को असहाय बताते हुए कहा कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम भी पराली जलाने को मजबूर हैं। हम भी नहीं चाहते हैं कि पराली से पर्यावरण को नुकसान पहुंचे, लेकिन हम करें तो करे क्या। वैसे भी प्रदेश में अब तक 70 फीसद धान की कटाई हो चुकी है और ऐसे में भारी मात्रा में पराली का आना स्वभाविक है। पराली जलाने से हरियाणा समेत पंजाब 10 शहरों की आबोहवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है। आइए आगे अब कृषि अधिकारियों से जानते हैं कि इस समस्या का निराकरण क्या है। आखिर ऐसे कौन से उपाय करने होंगे जिससे किसानों को पराली जलाने की समस्या छुटकारा मिलेगा।

कृषि अधिकारियों के मुताबिक, पराली जलाने की समस्या से किसानों को छुटकारा दिलाने के लिए इससे पहले भी सरकार की तरफ से कई प्रयास किए गए, लेकिन इन्हें आज तक धरातल पर उतारने की कोशिश नहीं की गई, जिसका नतीजा हुआ कि आज तक किसानों के मध्य पराली जलाने की परंपरा जारी है। कृषि अधिकारियों ने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि किसान भाई पराली ना जलाए, तो हमें इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को क्रियान्वित करना होगा, जिसमें कोर्ट ने किसानों को प्रति क्विंटल के हिसाब से सब्सिडी देने की बात कही थी। अगर हम इस फैसले को धरातल पर उतारने में सफल रहते हैं, तो किसान पराली जलाने से बचेंगे और स्थिति पहले की तुलना में बेहतर होगी।

पराली की समस्या दिल्ली की स्थिति बना रही है दुश्वार

एक तो पहले ही दिल्ली में प्रदूषण का कहर अपने चरम पर रहता है और ऊपर से रही सही कसर इस बार दिवाली पर फोड़े गए पटाखों ने पूरी कर दी है। वहीं, जो थोड़ी बहुत राहत की जो उम्मीदें थीं, उस पर पंजाब में लगातार जलाए जा रहे पराली ने पानी फेर दिया है। ऐसे में दिल्ली का प्रदूषण अत्याधिक गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है। नोएडा में 24 घंटे का औसत एक्यूआई देश में सबसे ज्यादा 475 पर रहा. फरीदाबाद (469), ग्रेटर नोएडा (464), गाजियाबाद (470), गुरुग्राम (472) में भी हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। वहीं, इसे लेकर राजनीतिक दलें सियासत करने में मसरूफ हैं। ऐसे में आम जनता को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। खैर, अब ऐसे में प्रदूषण की स्थिति को दुरूस्त करने के लिए आगे चलकगर सरकार की तरफ से क्या कुछ कदम उठाए जाते हैं। यह तो  फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।

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