टेरर फंडिंग केस में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली बेल
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। टेरर फंडिंग मामले में शीर्ष अदालत ने शाह को जमानत दे दी है। ट्रायल में हुई देरी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शब्बीर शाह को 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वो जेल में है। आरोप है कि घाटी में अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए शब्बीर ने LOC ट्रेड के जरिए फंड जुटाने में अहम भूमिका निभाई, हवाला ट्रांजैक्शन के जरिए भी पैसे लिए गए।
एनआईए की ओर से 4 अक्टूबर 2019 को इस केस की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई थी जिसमें शब्बीर को आरोपी बनाया गया था। इससे पहले जुलाई, 2023 में एनआईए कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शब्बीर की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जहां उनकी जमानत अर्जी खारिज हो गई थी। शब्बीर अहमद शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला कई वर्षों से लंबित है। NIA के द्वारा फाइल की गई मेन और पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उनके मुवक्किल के नाम का जिक्र नहीं था। शब्बीर काफी लंबे समय से जेल में बंद है इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए।
वहीं एनआईए के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अलगाववादी नेता की जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलीलों में कहा कि शब्बीर अहमद शाह समेत कई आरोपियों ने कश्मीर घाटी में गड़बड़ी फैलाने के उद्देश्य से और भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने की साजिश के तहत अवैध तरीके से फंड जुटाया। इसलिए उसे जेल में रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, चूंकि यह मुकदमा अपेक्षा से अधिक लंबा खिंच रहा है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जाती है। हालांकि बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा और जिसमें जमानत की शर्तें भी होंगी।
