August 5, 2026

Hind foucs news

hindi new update

एफसीआरए कानून में संशोधन का अमेरिकी सांसद राइली मूर ने किया विरोध, बताया ईसाइयों के खिलाफ

वॉशिंगटन। खबर है कि मोदी सरकार विदेशी योगदान विनियमन एक्ट यानी एफसीआरए में संशोधन करना चाहती है। एफसीआरए एक्ट में संशोधन की चर्चा के साथ ही अमेरिका में एक सांसद ने इसका विरोध कर दिया है। अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य राइली मूर ने एफसीआरए कानून में प्रस्तावित संशोधन पर चिंता जताई। अमेरिकी सांसद ने ये तक कहा कि एफसीआरए कानून में संशोधन से अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।

वेस्ट वर्जीनिया से डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने कहा कि एफसीआरए में संशोधन से भारत सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटीज का अधिग्रहण करने की ताकत मिल जाएगी। जो ईसाइयों के खिलाफ साफ तौर पर हमले जैसा होगा। उन्होंने कहा कि भारत में ईसाई उस वक्त से हैं, जब सेंट थॉमस मालाबार तट पर पहुंचे थे, लेकिन ईसाइयों के इस लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद एफसीआरए नियमों में संशोधन पर विचार कर रही। ताकि सरकार को चर्चों और धार्मिक टैरिटीज का अधिग्रहण करने की मंजूरी मिल जाए। राइली मूर ने हा कि अगर संशोधन होता है, तो ये भारत से द्विपक्षीय संबंधों में प्रमुख चिंता का विषय होगा।

राइली मूर ने ये बात मंगलवार को पोस्ट कर कही। जिसमें उन्होंने ये लिख दिया कि एफसीआरए संशोधन बिल पर भारत की संसद विचार कर रही है। जबकि, हकीकत ये है कि मंगलवार तक तो एफसीआरए संशोधन बिल पेश तक नहीं हुआ था। मोदी सरकार पहले ही ये बता चुकी है कि एफसीआरए संसोधन के जरिए उसका इरादा किसी एनजीओ को परेशान करने का नहीं। सरकार का इरादा विदेशी धन का धर्मांतरण के काम में इस्तेमाल बंद करना है। साथ ही सरकार एफसीआरए कानून के उल्लंघन पर सजा को भी 5 साल से घटाकर 1 साल करना चाहती है। ऐसे में सवाल ये है कि अमेरिकी सांसद को आखिर किस तरह लग रहा है कि भारत सरकार एफसीआरए का इस्तेमाल भारत में बसे ईसाइयों पर करेगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *