‘बिल्डर को ब्रोशर में ग्राहक से किए वादे के मुताबिक प्रोजेक्ट देना होगा’, सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
नई दिल्ली। तमाम बिल्डर्स पर आरोप लगता है कि वे अपने प्रोजेक्ट के शुरू होते वक्त ब्रोशर और वेबसाइट में बड़े वादे तो करते हैं, लेकिन बाद में उनको पूरा नहीं करते। ऐसे एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के बड़े बिल्डर डीएलएफ होम डेवलपर्स को फटकार लगाते हुए कहा है कि ब्रोशर में किए गए वादे सिर्फ मार्केटिंग नहीं, उसी के मुताबिक ग्राहक को प्रोजेक्ट देना होगा। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि बिल्डर्स की ओर से ग्राहकों से किए गए वादों को महज मार्केटिंग का तरीका बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डीएलएफ होम डेवलपर्स के ‘द प्राइमस’ प्रोजेक्ट के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसमें प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी सड़क में बदलावों पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर की ये जिम्मेदारी है कि जिस आवासीय प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है, उसे किए गए वादों के मुताबिक ही खरीदारों को दे। कोर्ट ने कहा कि आवासीय प्रोजेक्ट के ब्रोशर में बताया गया लेआउट और अन्य वादे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ही नहीं माने जा सकते। बिल्डर को प्रोजेक्ट उसी तरह विकसित करना होगा, जैसा ग्राहकों को बताया था।
सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि सड़क की चौड़ाई में बदलाव मामूली नहीं। ये मायने रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर को चेतावन दी कि अगर अगली सुनवाई तक ब्रोशर में किए गए वादों के मुताबिक कदम न उठाया गया, तो उचित आदेश दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि प्रोजेक्ट में 24 मीटर चौड़ी सड़क के 147 मीटर लंबे हिस्से में से 52 मीटर को ग्रीन एरिया बनाया गया है। सड़क का बड़ा हिस्सा भी सोसायटी के लोगों और मेहमानों की गाड़ियों की पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रहा। बेंच इससे नाराज हुई कि कई मौके देने पर भी बिल्डर ने इस कमी को नहीं सुधारा। कोर्ट ने कहा कि ये समझ से परे है कि हालात अब तक नहीं बदले। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से जांच करने को कहा था। सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क के लिए जरूरी जमीन न देने पर हरियाणा सरकार और अफसरों पर भी नाराजगी जताई।
