हार से बौखलाए विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश…चुनाव आयोग का पक्ष लेते हुए बीजेपी का पलटवार
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर विपक्ष सीईसी और चुनाव आयोग पर हमलावर है। इस बीच बीजेपी ने संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर पलटवार किया है। BJP सांसद संबित पात्रा ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 2014 से जब से मोदी सरकार बनी है तब से विपक्षी दल लगातार हर चुनाव में धराशायी होते गए हैं। जनता के द्वारा चुने न जाने के कारण विपक्ष खासकर कांग्रेस का वजूद खतरे में आया। हार से बौखलाया विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
पात्रा ने कहा कि अगर तीनों चुनाव आयुक्त आपस में संवाद या बातचीत नहीं करते, या सलाह-मशविरा नहीं करते और सब जी हां, जी हां करते रहते, तो विपक्ष कहता कि ये तो तानाशाही है, इन तीनों को इसी सरकार ने बनाया है और ये तीनों गोदी वाले हैं। बीजेपी सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि तीनों इलेक्शन कमिश्नर के बीच में 14 बार पत्राचार हुआ है। पात्रा बोले, यह तो एक अच्छे लोकतंत्र की निशानी है। आप मुझे बताइए कि लोकतंत्र में किसी मुद्दे पर आपस में चर्चा करना और अंत में उस पर निर्णय किया जाना, यह लोकतंत्र है कि या हां में हां मिलाना यह लोकतंत्र है।
बीजेपी सांसद बोले, आज सभी विपक्षी पार्टियां एक जाल में फंस गई हैं। यह दावा करने का जाल कि चुनाव आयोग और सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रहे थे। इसके उलट, मैं कहूंगा कि यह पूरी तरह से लोकतंत्र है। जहां बातचीत हो रही है। चुनाव आयोग ने अपने दस्तावेज के पहले ही पैराग्राफ में बहुत साफ तौर पर कहा है कि सारे आधिकारिक लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद, अंतिम नतीजा यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जो हुआ वो सर्वसम्मति से हासिल किया गया। तीनों आयुक्त एकमत थे, उनके बीच विचारों का कोई मतभेद या असहमति नहीं थी।
