जम्मू-कश्मीर में विधायकों की सैलरी 1.80 लाख से बढ़ाकर 3 लाख करने की तैयारी, राज्य में गरीबों का आंकड़ा भी जान लीजिए
श्रीनगर। एक तरफ देश के 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा, लेकिन अलग-अलग राज्यों में जनप्रतिनिधियों के ठाठ-बाट में कोई कमी आती नहीं दिख रही। ताजा मामला जम्मू-कश्मीर का है। जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में विधायकों और मंत्रियों की सैलरी और भत्ते बढ़ाने का बिल विधानसभा में पेश किया है। प्रस्ताव पास होने पर जम्मू-कश्मीर के विधायकों की सैलरी हर महीने 3 लाख रुपए हो जाएगी। अब तक जम्मू-कश्मीर के विधायकों को महीने में 1.80 लाख रुपए सैलरी दी जाती है।
जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला के पास कानून, न्याय और संसदीय मामलों का विभाग भी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन एक्ट 1956 में संशोधन का बिल पेश किया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्यों का पेंशन एक्ट में बदलाव का बिल भी उमर अब्दुल्ला ने पेश किया है। इन बिलों से राज्य के विधायकों, पूर्व विधायकों और मंत्रियों की सैलरी, भत्ता और पेंशन में बढ़ोतरी की जानी है। जम्मू-कश्मीर के विधायकों की सैलरी बढ़ाने का मुद्दा विधानसभा के बीते सत्र में उठा था। इसके लिए एक कमेटी बनाई गई थी। जिसने विधायकों की सैलरी और भत्ता बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने की सिफारिश की।
देश में तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में विधायकों को 2.5 लाख से 2.9 लाख तक सैलरी और भत्ता मिलता है। जबकि, सबसे कम सैलरी केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों के विधायकों की है। इन राज्यों में विधायकों को सैलरी के मद में हर महीने 34 हजार से 70 हजार रुपए मिलते हैं। जम्मू-कश्मीर में विधायकों की सैलरी में आखिरी बार बढ़ोतरी साल 2016 में की गई थी। इससे पहले राज्य रहते विधायकों की सैलरी हर महीने 80 हजार रुपए हुआ करती थी। यानी 2016 में भी विधायकों की सैलरी में दोगुना बढ़ोतरी हुई थी। यहां ये भी जानना जरूरी है कि जम्मू-कश्मीर की आबादी का करीब 5 फीसदी गरीबी रेखा से नीचे है।
