नई दिल्ली। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पावर टू एम्पावर’ के विजन को रेखांकित किया। मोदी ने कहा, भारत ‘लोकतंत्र की जननी’ है। हमारे यहां अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बहस होती है, हमारे यहां अलग-अलग मुद्दों पर जनता चर्चा करती है और इसमें डिजिटल पावर ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। जब भी दुनिया को एक स्थिर पिलर की जरूरत होती है तो भारत अपना दायित्व समझते हुए हाथ आगे बढ़ाता है। भारत जो करता है उसका क्रेडिट भी नहीं चाहता। दुनिया गर्व से कहती है कि भारत ने दुनिया को जीरो दिया है। इस जीरो ने पूरी मानवता को लाभ दिया लेकिन भारत ने इसके लिए कभी भी रॉयल्टी नहीं मांगी। आज भी भारत इसी भावना से काम कर रहा है।
मोदी बोले, इस साल ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की थीम दुनिया में उभरती नई पावर्स पर केंद्रित है। हर युग में पावर के अपने अपने स्रोत और परिभाषा रही है, लेकिन 21वीं सदी में, खासकर इस तीसरे दशक में, एक बड़ा बदलाव हो रहा है। आज टेक्नोलॉजी पावर है, डेटा पावर है, नॉलेज पावर है, इनोवेशन पावर है, लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि पावर किसके पास है, बल्कि सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है। क्या टेक्नोलॉजी कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी? क्या नॉलेज केवल कुछ लोगों की ताकत बनी रहेगी या सबकी क्षमता बढ़ाएगी? यहीं से एक नया विचार जन्म लेता है, और यह विचार है, ‘पावर टू एम्पावर’ (सशक्त बनने की शक्ति)। भारत में हमने इसे अपनी गवर्नेंस में, अपनी कार्य संस्कृति में लागू करके दिखाया है।
दुनिया को लेकर भारत के विचारों को साझा करते हुए मोदी बोले, ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ का विजन, ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ यह हमारी सोच और ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ यह हमारी दूरदृष्टि। यानी भारत जोड़ने और जुड़ने पर बल देता है और इसमें भी पावर का इस्तेमाल दूसरों को एम्पावर करने के लिए ही है। अनिश्चितता से भरी इस दुनिया में भारत रिलायबिलिटी और स्टेबिलिटी का विश्वास देता है। इस साल अप्रैल-जून क्वार्टर में भारत की ग्रोथ रेट 7.8% रही है जो एक मजबूत नींव पर खड़ी है। भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस तेज गति से आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की प्रगति दुनिया के साथ मिलकर आगे बढ़ने की सोच पर आधारित है। जब दुनिया को सस्ती दवाइयों की जरूरत होती है तो हर पांच में से एक किफायती जेनेरिक मेडिसिन भारत से आती है। जब डिजिटल आइडेंटिटी और पेमेंट के सॉल्यूशंस चाहिए तो भारत में विकसित मॉडल दिखता है। जब दुनिया को टैलेंट की जरूरत होती है तो भारत के स्किल्ड युवाओं पर भरोसा होता है। आज 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स हैं जो दुनियाभर की कंपनीज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
