नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस सांसद के द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की बेंच शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार सितंबर को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस को रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने राहुल गांधी के खिलाफ मुंबई मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज कराते हुए आपराधिक मानहानि का केस किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 2018 में राजस्थान में एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘चोरों के सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता ने कहा था कि राहुल गांधी की यह टिप्पणियां प्रधानमंत्री मोदी के लिए थीं और इससे बीजेपी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। महेश श्रीश्रीमाल की शिकायत पर मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से राहुल गांधी को समन जारी हुआ था।
राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में निचली अदालत के द्वारा जारी समन को रद्द करने की मांग की थी, मगर उनको वहां से राहत नहीं मिली थी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि बीजेपी कार्यकर्ता की ओर से दायर शिकायत सुनवाई के लायक नहीं है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि राहुल गांधी ने किसी पार्टी या किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था, ऐसे में केवल यह अर्थ निकालना कि यह बयान किसी विशेष पार्टी कार्यकर्ताओं पर लागू होता है, अनुचति है और इस आधार पर आपराधिक मानहानि का मामला नहीं बन सकता।
