April 26, 2026

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आतंकी खालिद मुजाहिद मामले में पूर्व DGP ने बताया, कैसे अखिलेश सरकार ने पुलिस पर ही केस दर्ज करा दिया था

नई दिल्ली। याद कीजिए कि आज से 9 साल पहले यानी 2013 में यूपी में एक मामला तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी यानी समाजवादी पार्टी के गले की फांस बन गया था। वह मामला कचहरी सीरियल ब्लास्ट के आरोपी खालिद मुजाहिद की मौत का था। खालिद यूपी के अदालतों में धमाके का आरोपी था, लेकिन उसकी मौत पुलिस हिरासत में ही हो गई थी। हिरासत में हुई इस मौत ने तब तमाम सुर्खियां बटोरी थी, और मामले को गंभीर बनाने के लिए अखिलेश सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे। यही नहीं खालिद के परिजनों के दबाव के चलते सपा सरकार ने यूपी के पूर्व डीजीपी, एडीजी और एटीएस के चार अधिकारियों समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ हत्या और हत्या के साजिश के आरोप में केस दर्ज किए थे। बड़े-बड़े अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज के बाद तब यह माना गया था कि अखिलेश इस मामले में तुष्टीकरण की राजनीति का सहारा ले रहे हैं। बहरहाल, उस समय के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह (जिनपर भी केस दर्ज किया गया था) ने एक चैनल के लाइव शो के दौरान अखिलेश पर निशाना साधते हुए विस्तार से पूरे मामले को सामने रखा है। आइए जानते हैं विक्रम सिंह ने क्या कहा …

…….ताकि संदेश दिया जा सके कि हमारे आतंकियों की तरफ आंख उठाकर भी मत देखना’ – पूर्व डीजीपी

न्यूज 18 इंडिया चैनल पर एक  डिबेट के दौरान एंकर अमन चोपड़ा ने पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह( वे भी डिबेट का हिस्सा थे) से 2013 में हुए इस कांड को तफ्सील से जनता के सामने रखने की अपील की, जिसके बाद विक्रम सिंह ने कहना शुरू किया, हालांकि इस दौरान वे थोड़े गुस्से में लग रहे थे। उन्होंने कहा,-‘ हां जी, ये बात 2013 की है। मैं अवकाश प्राप्त कर चुका था। बिजलाल मेरे बाद सर्विंग डीजी थे, वे सिविल डिफेंस में थे, और उन 40 कमांडोज को जिन्होंने खालिद मुजाहिद को गिरफ्तार किया था। क्योंकि ये जेल से कोर्ट लाया जा रहा था बाराबंकी लुक हाकर के इमरिया लुक से, वहां हममें से कोई भी मौजूद नहीं था, और हम 40 कमांडोज एसटीएफ के, ब्रिजलाल सर्विंग डीजी, और मैं रिटायर डीजीपी, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसलिए के, एक संदेश देने के लिए की हमारे आतंकवादियों के तरफ देखने की कोशिश मत करना।’ इस दौरान विक्रम सिंह सीधे-सीधे सपा को घेर रहे थे।

‘तुष्टीकरण की मजबूरी तुम्हारी हो सकती हैं हमारी कोई मजबूरी नहीं’ – विक्रम सिंह

विक्रम सिंह यहीं नहीं रुके उन्होंने पुलिस और सरकार में अंतर करते हुए आगे कहा कि,- ‘तो कौन सी एसटीएफ, कैसा एटीएस,जब तुमने दो डीजीपी के खिलाफ मुकदमा हत्या का लिख दिया। कौन कांस्टेबल, कौन सबइंस्पेक्टर कोशिश करेगा आतंकवादियों को छूने की, देखने की, ये माना कि तुम्हारी(सपा)मजबूरी हो सकती है तुष्टीकरण की, मेरी कोई मजबूरी नहीं है। न किसी पुलिस की मजबूरी है तुष्टीकरण की। अगर किसी राष्ट्रविरोधी तत्व ने देश की तरफ आंख उठाई तो हजार विक्रम सिंह कुर्बान, हजार ब्रिजलाल कुर्बान, हजार एसटीएफ के जवान कुर्बान हो जाएंगे, लेकिन भारत मां की तरफ आंख भी नहीं उठाने देंगे।’

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