नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन को प्रेरणादायी बताया है। मोदी बोले, नागपुर में शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव अवसर पर सरसंघचालक ने राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के सशक्तिकरण सहित कई विषयों पर विस्तार से अपनी बातें रखी हैं। सेवा और राष्ट्र निर्माण पर उन्होंने पूरा बल दिया है, जो संघ के सभी स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने पंच परिवर्तन का भी उल्लेख किया है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के विशेष अवसर पर सभी स्वयंसेवकों को मोदी ने बधाई दी। उन्होंने कहा, मैं उन सभी विभूतियों को भी नमन करता हूं, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम और सेवाभाव से संघ को सींचा और संवारा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक प्रतिबद्धता का गौरवशाली शताब्दी वर्ष पूर्ण किया है। अनगिनत स्वयंसेवकों ने अपने समर्पण, कर्तव्य-निष्ठा और राष्ट्र-प्रथम की भावना से सदैव समाज के उत्थान के लिए कार्य किया है। मुझे विश्वास है कि यह भावना आने वाले समय में भी देश को और सशक्त एवं सुदृढ़ करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी देशवासियों को विजयादशर्मी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है। आपको बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की संस्कृति और परंपराओं का जिक्र करते कहा कि भारत माता का स्थान सर्वोच्च है। देश में अलग-अलग पंथ, भाषाएं, जातियां और रीति-रिवाज हैं, लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। इसके साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी को नशे से बचने का आह्वान किया। भागवत ने कहा कि भारत में रिजीम चेंज न हुआ है न कभी होगा।
