बेंगलुरू

नाबालिग कार चालक के पिता पर चलेगा केस, कर्नाटक हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार, एक्सीडेंट में तीन लोगों की गई थी जान

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नई दिल्ली। कर्नाटक हाईकोर्ट ने रोड एक्सीडेंट से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए नाबालिग कार चालक के पिता के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की कार्यवाही को रद करने से इनकार कर दिया है। कर्नाटक हाईकोर्ट जज ने कहा कि कार की स्टीयरिंग किसी बच्चे के हाथ का खिलौना नहीं बन सकती। दरअसल, इस व्यक्ति ने अपने नाबालिग बेटे को कार चलाने की अनुमति दी और उसने तेज रफ्तार में दंपति और उसके नाबालिग बच्चे को टक्कर मार दी थी जिससे तीनों की मौत हो गई थी। एक्सीडेंट की यह घटना दिसंबर 2020 में पुराने बेंगलुरु-मैसूर रोड पर हुई थी।

मैसूर निवासी याचिकाकर्ता नदीम-उर-रहमान ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। निचली अदालत ने नदीम पर गैर-इरादतन हत्या की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। वहीं नदीम ने कोर्ट में कहा कि उसकी जानकारी के बिना उसका नाबालिग बेटा चुपचाप कार लेकर चला गया। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि एक्सीडेंट के इस मामले को गैर इरादतन हत्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। वहीं सरकारी वकील ने अपनी दलील में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्य इस बात को दर्शाते हैं कि पिता ने खुद अपने नाबालिग बेटे को कार की चाबी सौंपी थी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि अपने नाबालिग बच्चों को गाड़ी चलाने की अनुमति प्रदान करने वाले माता-पिता किसी बड़ी तबाही के बाद अपने बच्चे के नाबालिग होने की आड़ लेकर खुद की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। माता-पिता को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि नाबालिग के पिता को गैर-इरादतन हत्या की कार्यवाही से राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस नागप्रसन्ना ने अपना फैसला सुनाते हुए नाबालिगों द्वारा होने वाले सड़क हादसों के आंकड़े भी साझा किए।

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