February 15, 2026

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संन्यासी और संत का स्वाभिमान उसका राष्ट्र, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान

नई दिल्ली। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर जारी विवाद के बीच यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ी बात कही है। हरियाणा में एक कार्यक्रम के दौरान यूपी सीएम ने कहा कि एक योगी, संन्यासी और संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती, धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है, राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान है। अगर कोई राष्ट्रीय स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसकी चुनौती का मुकाबला करने लिए उसे सामने आकर खड़े हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रचने वालों से हमें सावधान रहना होगा।

योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि डेमोग्राफी बदलने की जो साजिश हो रही है, लव जिहाद के नाम पर हमारी बेटियों के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है, इसको सख्ती से रोकेंगे। परिवारों को जागरूक करेंगे, संस्कारित करेंगे और संस्कारवान परिवार के माध्यम से एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के अभियान में हम भी योगदान देंगे और हमारे संतों, समाज के जागरूक लोगों को इस अभियान में आगे बढ़ना होगा। इसकी शुरुआत होती है नशा के खिलाफ अभियान से, नशा नाश का कारण है। पूरी पीढ़ी को खोखला बना देता है, सोचने, समझने की सामर्थ्य को नष्ट कर देता है, तमाम पाप के लिए प्रेरित करता है। हमें उसके खिलाफ अभियान चलाने की आवश्यकता है। सीमा पार से आने वाला जो ड्रग है वो देश के दुश्मनों की साजिश का परिणाम है।

सोनीपत में आयोजित मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित होने के दौरान योगी ने कहा कि भारत की सनातन धर्म की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में नाथ पंथ भारत के प्राचीनतम उपासना विधियों में से एक है। जिसने जीवन के मूल्यों और जीवन को जीने के लिए सदैव एक नई प्रेरणा दी है। समाज को उसके साथ जुड़े, उसके साथ मिलकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है और यही कारण है कि भारत में आप जहां कहीं भी जाएंगे नाथ सिद्धों, योगीयों की एक लंबी श्रृंखला, उनके मठ, उनके मंदिर, उनका धूना इनके माध्यम से एक लंबी श्रृंखला देखने को मिलेगी। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम सर्वत्र फैले हुए यह धर्मस्थल सनातन धर्म के प्रति, उनके मूल्यों और आदर्शों के प्रति नाथ पंत की प्रतिबद्धता को भी प्रस्तुत करते हैं।

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