गोरखपुर में खून का काला कारोबार बेनकाब, कार से 100 यूनिट रक्त बरामद; दो गिरफ्तार
**मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का आरोप, ऊंचे दाम पर ब्लड बैंकों को बेचने की थी तैयारी; रक्त कहां से आया और किन लोगों तक पहुंचना था, पुलिस खंगाल रही नेटवर्क**
रविन्द्र बंसल
**गोरखपुर।** मरीजों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रक्त को मुनाफे का जरिया बनाने का मामला सामने आया है। गोरखपुर में पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध रक्त कारोबार का खुलासा करते हुए एक कार से करीब 100 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स बरामद की हैं। मामले में मुरादाबाद निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद रक्त को ऊंचे दाम पर दूसरे ब्लड बैंकों को बेचने की तैयारी थी।
कार्रवाई रामगढ़ताल थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस और औषधि विभाग की टीम ने संदिग्ध कार की जांच की तो उसमें बड़ी मात्रा में पैक्ड रेड ब्लड सेल्स मिलीं। इतनी बड़ी मात्रा में रक्त को निजी वाहन से ले जाने और उसके कारोबार से जुड़े तथ्यों ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। बरामद रक्त को कब्जे में लेकर उसके नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं।
जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि करीब 100 यूनिट रक्त आरोपियों के पास कहां से आया। इसे किस ब्लड बैंक या अन्य स्रोत से हासिल किया गया था, इसके संग्रहण और परिवहन में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं और इसे किन ब्लड बैंकों तक पहुंचाया जाना था। पुलिस इन सभी बिंदुओं पर आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
रक्त की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण भी जांच के दायरे में है। पैक्ड रेड ब्लड सेल्स को निर्धारित तापमान और चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखना जरूरी होता है। नियमों की अनदेखी होने पर रक्त की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मरीजों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। ऐसे में बरामद रक्त की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।
मामले ने ब्लड बैंकों की निगरानी व्यवस्था और रक्त की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि रक्त का अवैध स्रोत और आपूर्ति नेटवर्क सामने आता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस आरोपियों के संपर्कों, रक्त की आपूर्ति के स्रोत और संभावित खरीदारों का पता लगाने में जुटी है।
**जांच के अहम सवाल**
– रक्त कहां से जुटाया गया था?
– इसे किस ब्लड बैंक से निकाला गया या किस स्रोत से हासिल किया गया?
– निर्धारित तापमान और भंडारण के नियमों का पालन हुआ या नहीं?
– किन ब्लड बैंकों या खरीदारों तक इसकी आपूर्ति होनी थी?
– क्या इस कारोबार में अन्य लोग भी शामिल हैं?
रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री का अवैध कारोबार केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं है। इसमें मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य सीधे दांव पर लग सकते हैं। फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी और 100 यूनिट रक्त की बरामदगी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होना बाकी है।
संपादकीय तथ्य-सावधानी: रक्त के दूषित होने की पुष्टि जांच रिपोर्ट से पहले नहीं हुई है। इसलिए खबर में इसे दूषित रक्त की तस्करी घोषित करने के बजाय कथित अवैध रक्त कारोबार लिखा गया है।
