देश

दिल्ली में ग्रेप-2 की पाबंदियां, लोनी में रोज जल रहा जहरीला ई-वेस्ट

शेयर करें:
Oplus_131072

दिल्ली में ग्रेप-2 की पाबंदियां, लोनी में रोज जल रहा जहरीला ई-वेस्ट

आवास विकास की खाली जमीन बनी प्रदूषण का ठिकाना, धुएं से ग्रामीणों का दम घुटा; आंखों में जलन और सांस की तकलीफ से लोग परेशान, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल

रविन्द्र बंसल

Ad Zone: in_content

लोनी। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेप-2 लागू कर दिया गया है, लेकिन गाजियाबाद के लोनी में प्रदूषण फैलाने वालों पर इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा। यहां ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला ई-वेस्ट खुलेआम आवास विकास क्षेत्र की खाली पड़ी जमीन पर लाकर जलाया जा रहा है। आरोप है कि यह गतिविधि किसी एक दिन की नहीं, बल्कि प्रतिदिन का सिलसिला बन चुकी है। कचरे से उठने वाला काला धुआं आसपास के ग्रामीण और रिहायशी इलाकों में फैलकर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

ई-वेस्ट और प्लास्टिक के तारों को आग के हवाले करने से उठने वाला जहरीला धुआं आबोहवा में घुल रहा है। क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और दुर्गंध जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लोग विभिन्न तरह की बीमारियों से परेशान हैं। प्रदूषण के कारण बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। इसके बावजूद खुले स्थान पर रोजाना जलाए जा रहे कचरे को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि ट्रॉनिका सिटी की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला ई-वेस्ट आवास विकास की खाली जमीन तक कैसे पहुंच रहा है और उसे खुलेआम जलाने की छूट किसके संरक्षण में मिल रही है? औद्योगिक कचरे के संग्रह, परिवहन और निस्तारण की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद यदि इस तरह कचरा जलाया जा रहा है तो यह पर्यावरणीय नियमों की खुली अवहेलना है। इसकी जिम्मेदारी केवल कचरा जलाने वालों तक सीमित नहीं, बल्कि निगरानी और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

एक तरफ प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर दिल्ली में पाबंदियां लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लोनी में जहरीला कचरा जलाकर हवा को दूषित किया जा रहा है। विडंबना यह है कि प्रदूषण का सीधा असर झेल रहे स्थानीय लोगों की शिकायतों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई सामने नहीं आ रही है।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और संबंधित औद्योगिक विभागों से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने, ई-वेस्ट जलाने वालों की पहचान करने, कचरा वहां पहुंचाने वाली कंपनियों की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आवास विकास की खाली जमीन पर निगरानी और औद्योगिक कचरे के अधिकृत एवं वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

**सवाल साफ है—जब प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां रोजाना हो रही हैं और लोगों को सांस लेने तक में परेशानी हो रही है, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के लिए किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा का इंतजार क्यों कर रहे हैं?**

आगे क्या पढ़ें AI

अपनी राय रखें