यूपी में अब ऐसे राज्य कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने जा रही योगी सरकार, जानें कब होगा एक्शन
नई दिल्ली। साल 2017 में जब उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी ने ये साफ कर दिया था कि उनके राज में जनता पर किसी तरह का कोई अत्याचार नहीं होगा। सीएम योगी ने ये साफ कर दिया था कि उनके राज में भू माफियाओं, गुंडे-बदमाशों को बक्शा नहीं जाएगा। योगी सरकार के प्रदेश में किए गए बेहतर काम का ही ये नतीजा है कि एक फिर राज्य में उनकी सरकार लौटी। अब जब दूसरी बार योगी प्रदेश में सत्ता में लौटे हैं तो वो पहले के भी मुकाबले अपने काम को लेकर एक्शन मोड में हैं। सीएम योगी एक के बाद एक ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे अपराधियों के साथ ही सरकार में काम कर रहे अधिकारी भी अपने कर्तव्यों को लेकर किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरत रहे। इसी क्रम में अब योगी सरकार की तरफ से एक ऐसा कदम बढ़ाया गया है जिससे राज्य कर्मचारियों में हाहाकार मच गया है।
बता दें, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी विभागों में मौजूद 50 साल से अधिक उम्र वाले उन कर्मचारी जो जबरन रिटायर करने जा रही है जो कि भ्रष्टाचार, गंभीर बीमारी, काम न करने वाले और जांच में फंसे हैं। 31 जुलाई तक रिटायरमेंट पर फैसला करना अनिवार्य कर दिया गया है। 15 अगस्त तक इसकी जानकारी कार्मिक विभाग को देनी होगी।
60 की उम्र पूरी होने पर किए जाते हैं रिटायर
उत्तर प्रदेश में 60 साल की उम्र पूरी होने पर कर्मचारी रिटायर किए जाते हैं। पहले कुछ विभागों में इसके लिए 58 साल भी था। मंगलवार को मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने विभागाध्यक्षों को एक आदेश जारी किया। इस आदेश के बाद राज्य कर्मचारी में हाहाकार मचा गया। इस जारी हुए आदेश में कहा गया है कि स्क्रीनिंग कमेटी 31 मार्च 2022 को 50 साल की आयु पूरी करने वालों के नामों पर विचार विमर्श करेगी। आयु पूरी करने वाले किसी सरकारी सेवक के मामले में स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्ताव रखकर अगर उसे सेवा में बनाए रखने का फैसला एक बार हो जाता है तो इसके लिए बार-बार स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष उसके नाम को दोबारा रखने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे कर्मचार सेवानिवृत्त की अवधि तक सेवा में बने रहेंगे।
ये लोग नहीं होंगे जबरन रिटायर
- ऐसे कर्मचारी जो जिस पद पर है उसके लिए उपयोगी हैं। जिन कर्मचारियों का प्रदर्शन बेहतर है। जो अपने काम को पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।
- जिन कर्मचारियों पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है।
- जिस कर्मचारी पर किसी तरह की कोई जांच न हो रही हो।
जनवरी में ही जारी कर दिया था आदेश
इस संबंध में 11 जनवरी व दो फरवरी 2022 को भी यूपी में डीजीपी मुख्यालय ने आदेश जारी किया था। मामले में कार्रवाई डीजी/एडीजी सतर्कता, एसआईटी, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, पीएसएल एवं सहकारिता, सभी जोनल एडीजी, चारों पुलिस आयुक्त, आईजी-डीआईजी जेल एवं अपर पुलिस अधीक्षक केंद्रीय वस्त्र भंडार कानपुर व सीआर सीतापुर के स्तर से की जानी है।
दिल्ली में भी जबरन रिटायर की तैयारी
केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं दिल्ली सरकार में निष्क्रिय सरकारी कर्मचारी समय से पहले जबरन सेवानिवृत्त किए जाएंगे। उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर हो रही कार्रवाई के बाद ये निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली सरकार में मौजूद ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा रिपोर्ट देने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है।
