ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में बड़ी तबाही मचाने वाली फ्रांस की हैमर मिसाइल अब देश में ही बनेगी, जानिए इसकी खासियत
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई ठिकानों को भारत ने फ्रांस की बनी हैमर मिसाइलों से ध्वस्त किया था। अब फ्रांस के साथ मिलकर भारत इन हैमर मिसाइलों को अपने यहां बनाने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान उनके साथ आ रहीं रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन के साथ बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को बेंगलुरु में हैमर मिसाइल बनाने के समझौते पर दस्तखत करने वाले हैं। इसके अलावा कैथरीन और राजनाथ भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग समझौते को और 10 साल बढ़ाने के करार पर भी दस्तखत करेंगे।
हैमर मिसाइल को फ्रांस की कंपनी साफ्रान बनाती है। अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ मिलकर हैमर मिसाइलों का देश में ही निर्माण किया जाएगा। हैमर मिसाइलें राफेल विमानों में लगाई जाती हैं। डिफेंस एक्वीजिशन काउंसिल (डीएसी) पहले ही फ्रांस से और 114 राफेल विमानों की खरीद को हरी झंडी दे चुका है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक में राफेल विमानों के सौदे पर आखिरी मुहर लगेगी। भारत में हैमर मिसाइलों के निर्माण से इनकी लागत में काफी कमी होने वाली है। साथ ही अन्य देशों को भी हैमर मिसाइलों का निर्यात किया जा सकेगा।
हैमर मिसाइल से दुश्मन के इलाके में 70 किलोमीटर दूरी तक बड़ी तबाही मचाई जा सकती है। हैमर मिसाइल से दुश्मन के बंकर, ठिकानों, बख्तरबंद वाहनों को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है। हैमर मिसाइल बिना जीपीएस के भी काम करती है। इसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक से जाम करना नामुमकिन है। पहाड़ी इलाकों में छिपे लक्ष्यों पर भी हैमर मिसाइल सटीकता से वार करती है। हैमर मिसाइलों के भारत में निर्माण के लिए साफ्रान इनकी पूरी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए तैयार है। उन्नत हथियार देने में फ्रांस हमेशा भारत के साथ रहा है। भारतीय वायुसेना पहले से ही फ्रांस में बने मिराज लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है। फ्रांस से मोदी सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे। बीते साल विमानवाहक पोत विक्रांत के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की डील भी फ्रांस से हुई है।
