औद्योगिक तबाहियों की जमीन बन चुका है चीन, सफाई से दबा दी जाती हैं हजारों दर्दनाक मौतें
शिनजियांग। चीन में एक के बाद दूसरी औद्योगिक तबाहियां हो रही हैं। इन तबाहियों में हजारों चीनी नागरिकों की मौतें हो रही हैं। चीन की सत्ताधारी पार्टी अपनी ताकत के दम पर इन पर पर्दा डाल रही है। हालात इतने भयावह हो चले हैं कि मरने वाले मासूमों की आह तक बाहर नही आ सकती है। अभी हाल ही में, 13 जून 2021 की तारीख ऐसी ही एक तबाही का भयानक घाव लेकर सामने आई। सेंट्रल चीन के एक बाजार में हुए इस खतरनाक गैस धमाके में करीब 25 लोग मारे गए और 130 से अधिक लोग घायल हो गए। यह चीन में हाल ही में हुई खतरनाक औद्योगिक त्रासदियों में से एक थी।
इसी तरह पिछले साल नवंबर माह में उत्तरी चीन के झांगजियाको शहर के एक प्लांट में गैस लीक से 24 लोग मारे गए और 21 से अधिक घायल हो गए। खास बात यह है कि यह शहर साल 2024 के विंटर ओलंपिक के मेजबान शहरों में से एक है। इससे एक महीने बाद ही बीजिंग यूनिवर्सिटी की एक लैबोरेट्री में हुए धमाके में तीन विद्यार्थियों की मौत हो गई। चीन में एक के बाद दूसरी इन तबाहियों की वजह चीन का सरकार का फरमान है। इस फरमान के तहत पर्यावरण और सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर औद्योगिक विकास की ट्रेन चलाई जा रही है।
आलम यह है कि चीन के भीतर कई ऐसी बड़ी तबाहियां हुई हैं जो खबर में भी नही आईं। ऐेसी ही एक तबाही साल 2015 में चीन की उत्तरी पोर्ट सिटी तिआनजिन में हुई। यहां 173 लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए। इस घटना को छुपाने के लिए चीन ने इसके मीडिया कवरेज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। सोशल मीडिया में भी कोई खबर नही आने दी गई। चीन जानबूझकर इन घटनाओं को कम करके दिखाता है। हांगकांग के चाइना लेबर बुलेटिन के मुताबिक वर्क प्लेस एक्सीडेंट को चीन की सरकार जानबूझकर नजरंदाज करती है।
इस सबके पीछे जबरदस्त राजनीतिक दबाव भी काम करता है। इस बारे में चाइना लेबर बुलेटिन के रिसर्चर कीगन एल्मर ने सनसनीखेज खुलासा किया। एल्मर के मुताबिक लोगों को खामोश करने के लिए अलग अलग तरीके अख्तियार किए जाते हैं। इसकी खातिर उन्हें दंडित करने से लेकर बदले की कार्यवाही तक को अंजाम दिया जाता है। सेंट्रल चीन में हुए गैस धमाके के बाद चाइना गैस होल्डिंग के आठ कर्मियों को हिरासत में ले लिया गया ताकि सभी को मैसेज मिले कि खबर को बाहर नही जाने देना है।
इन दुर्घटनाओं के बारे में चीन का आधिकारिक आंकड़ा भ्रम पैदा करने वाला और अपारदर्शी होता है। इसमें वर्क प्लेस के खतरों, खतरे वाले उद्योगों, मौत के कारणों जैसी बातों को जानबूझकर छिपाया जाता है। पारदर्शिता की इस कमी के चलते जनता चीन के भीतर वर्क प्लेस के खतरों के बारे में बिल्कुल अनजान रहती है। चीन के हाथ हजारों निर्दोष मजदूरों के खून से रंगे हुए हैं। हर साल इनका बलिदान होता है। चीन की मुनाफाखोरी की कभी न खत्म होने वाली भूख कितने ही मासूमों की बलि ले रही है।
