June 29, 2026

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चंद्रयान-3 की सफलता से हैरत में अमेरिका के वैज्ञानिक, इसरो से नासा ने मांगी टेक्नोलॉजी!

बेंगलुरु। देश के अंतरिक्ष विज्ञान ने कितनी तरक्की की है, ये इसरो चीफ एस. सोमनाथ के बयान से साफ हो जाता है। इसरो के चीफ एस. सोमनाथ ने कहा है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान-3 की टेक्नोलॉजी भारत से मांगी है। सोमनाथ ने कहा कि जब इसरो ने चंद्रयान-3 बनाया, तो नासा के वैज्ञानिकों को बेंगलुरु स्थित अपने मुख्यालय बुलाया। नासा के वैज्ञानिकों को बताया गया कि किस तरह चंद्रयान-3 को डिजाइन किया गया है और चांद की सतह पर उसे किस तरह उतारा जाएगा। इस पर नासा के वैज्ञानिकों ने इतने सस्ते में चंद्रयान बनाने पर हैरत जताई और इसकी टेक्नोलॉजी अमेरिका को देने के लिए कहा। अमेरिका को इससे पहले भी इसरो लगातार सहयोग करता रहा है। इसरो अपने सैटेलाइट और चंद्रयान-1 से मिला डेटा नासा को दे चुका है। चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी होने की अहम जानकारी जुटाई थी। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और अमेरिका का सहयोग कितना बढ़ गया है, ये इसी से समझा जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी जब पिछले दिनों अमेरिका गए थे, तो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत का अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजने का प्रस्ताव भी दिया था।

सोमनाथ ने ये जानकारी भी दी कि सूरज के बारे में शोध करने के लिए जो आदित्य एल-1 यान भेजा गया है, वो भी लैंग्रेंजियन प्वॉइंट 1 तक की यात्रा निर्बाध कर रहा है। सोमनाथ ने बताया कि जनवरी में ये यान लैंग्रेंजियन प्वॉइंट 1 तक पहुंच जाएगा। बीते दिनों इसरो ने जानकारी दी थी कि आदित्य एल-1 यान धरती से 9 लाख किलोमीटर दूर पहुंच गया है। इस यान को 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करनी है। इसरो चीफ सोमनाथ ने जानकारी दी कि अब अंतरिक्ष संगठन के वैज्ञानिक शुक्र ग्रह की तरफ यान भेजने और भारत के पहले गगनयान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयारी में जुटे हैं। बिना मानव के गगनयान की पहली परीक्षण उड़ान अगले साल होने की संभावना है। गगनयान के यात्रियों के लिए जो लोग चुने गए हैं, उनको ट्रेनिंग देने का काम भी चल रहा है।

भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 को उतारकर पहला ऐसा देश होने का गौरव हासिल किया। इस साल 23 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की सतह पर उतरा था। इस तारीख को सरकार ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के तौर पर हर साल मनाने का फैसला किया है। चंद्रयान-3 ने चांद पर कई प्रयोग किए। चंद्रयान-3 ने अपने सेंसर से चांद की सतह और कुछ गहराई में तापमान की जानकारी दी थी। इसके अलावा चंद्रयान-3 के यंत्रों के जरिए चांद पर लोहा, क्रोमियम, एल्युमिनियम, कैल्शियम और टाइटेनियम होने की जानकारी भी मिली थी।

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