June 26, 2026

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गाजा में जमीनी हमले की तैयारी कर रहा इजरायल, फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने हमास के खिलाफ दिया बयान

यरुशलम। हमास आतंकियों के 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमले के बाद मध्य-पूर्व में दोनों के बीच जंग जारी है। हमास के खिलाफ इस जंग में अब इजरायल और उसके सहयोगी देशों को फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास का साथ भी मिलता दिख रहा है। फिलिस्तीन की आधिकारिक न्यूज एजेंसी वफा ने कहा है कि राष्ट्रपति महमूद अब्बास का मानना है कि हमास की गतिविधियां और नीतियां फिलिस्तीन के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं। इजरायल पर हुए आतंकी हमलों के बाद महमूद अब्बास पहले फिलिस्तीनी नेता हैं, जिन्होंने हमास के खिलाफ बयान दिया है। खास बात ये है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी महमूद अब्बास से फोन पर बात करने के बाद कहा था कि फिलिस्तीन के सभी नागरिकों का हमास प्रतिनिधित्व नहीं करता। इस बीच, पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने जो बाइडेन को अगले रविवार इजरायल का दौरा करने का न्योता दिया है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन आज एक बार फिर मध्य-पूर्व के दौरे पर पहुंच रहे हैं।

उधर, इजरायल ने गाजा की सीमा पर 300000 के करीब सैनिक और टैंक वगैरा तैनात कर दिए हैं। इजरायल ने दावा किया है कि उसकी अपील के बाद उत्तरी गाजा छोड़कर 600000 फिलिस्तीनी दक्षिणी हिस्से में चले गए हैं। इजरायल ने रविवार को दक्षिणी गाजा में पानी की सप्लाई बहाल कर दी थी। बेंजामिन नेतनयाहू और जो बाइडेन के बीच बातचीत के बाद इजरायल ने पानी की बहाली की है। उत्तरी गाजा में इजरायल जमीन, आसमान और समुद्र के रास्ते हमास आतंकियों के खात्मे की कार्रवाई करने जा रहा है। इजरायल ने लेबनान में एक और फिलिस्तीनी आतंकी गुट हिजबुल्ला पर भी हमले जारी रखे हैं। इजरायल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखा है। उसके टैंक और तोप के अलावा लड़ाकू विमान यहां हिजबुल्ला के ठिकानों पर बमबारी कर रहे हैं।

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने फिर दोहराया है कि हमास का पूरी तरह खात्मा करने के बाद ही इजरायल दम लेगा। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने न्यूज चैनल सीबीएस से बातचीत में आशंका जताई है कि अगर फिलिस्तीन में संघर्ष बढ़ा और लेबनान की तरफ दूसरा मोर्चा खुला, तो जंग में ईरान भी उतर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अगर युद्ध कुछ और इलाकों तक पहुंचा, तो इजरायल में जलजला यानी भूकंप जैसी हालत आ जाएगी। खबर ये है कि फ्रांस ने ईरान से कोई गतिविधि न करने को कहा है, लेकिन ईरान हमेशा हमास और हिजबुल्ला का समर्थन करता है। अगर इजरायल के हमले से दोनों आतंकी संगठनों की दिक्कत बढ़ी, तो ईरान के लिए शायद चुप बैठना कठिन हो जाएगा।

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