June 29, 2026

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छात्रवृत्ति के लिए बायोमीट्रिक सत्यापन का आदेश आते ही यूपी में गायब हुए 27 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र, 97000 से ज्यादा का पता नहीं

लखनऊ। बीते दिनों खबर आई थी कि अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने के मामले में देश के कई राज्यों में बड़ा घोटाला हुआ है। अब ये जानकारी सामने आई है कि यूपी में भी बायोमीट्रिक सत्यापन का फैसला होने के बाद 27 फीसदी अल्पसंख्यक छात्रों का कुछ पता नहीं चल रहा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने इन अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति और फीस की भरपाई के लिए उनके आधार कार्ड के बायोमीट्रिक की जांच का आदेश दिया था। हिंदी अखबार अमर उजाला के मुताबिक बायोमीट्रिक जांच का आदेश आने के बाद सीतापुर, कुशीनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, मुरादाबाद और बिजनौर में एक लाख के करीब अल्पसंख्यक छात्र नहीं मिल रहे। इस जानकारी के सामने आने के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार अब बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक छात्रों के मिलने वाली छात्रवृत्ति की जांच कराने जा रही है। योगी सरकार ने पहले ही अवैध मदरसों की जांच कराई थी। बीते दिनों अवैध मदरसों को विदेशी फंडिंग की जांच के लिए यूपी सरकार ने एसआईटी का गठन भी किया है।

अखबार की खबर के मुताबिक अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति और फीस की भरपाई सरकार की तरफ से की जाती है। इसके लिए यूपी में 359659 अल्पसंख्यक छात्रों ने आवेदन दिया था। जब इनकी बायोमीट्रिक जांच का आदेश हुआ, तो आवेदन करने वाले छात्रों में से 97463 सामने आए ही नहीं। खबर के मुताबिक मुरादाबाद में छात्रवृत्ति का आवेदन करने वाले 12161 अल्पसंख्यक छात्रों का पता नहीं है। वहीं, बिजनौर में 6738, फर्रुखाबाद में 4228, कुशीनगर में 5630, बस्ती में 3726, सीतापुर में 4073, संत कबीरनगर में 3339, गोंडा में 4416 अल्पसंख्यक छात्रों का अता-पता नहीं है। अखबार के मुताबिक रामपुर, संभल, अमरोहा, मेरठ, औरैया, अलीगढ़, सहारनपुर, उन्नाव, अलीगढ़ और अंबेडकरनगर में भी तमाम छात्रों का पता नहीं चल रहा है। जानकारी के मुताबिक अल्पसंख्यक छात्रों के बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए संस्थान और नोडल अफसर के पास करीब 4700 आवेदन अभी जस के तस रखे हैं। आवेदन आगे भेजने के लिए 27 अक्टूबर आखिरी तारीख है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने साल 2022-23 में अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति और फीस की भरपाई के लिए आवेदन करने वालों का बायोमीट्रिक सत्यापन कराने का आदेश दिया था। मंत्रालय को इस योजना में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। सभी राज्यों को बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए कहा गया था। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय अभी स्मृति इरानी के पास है। उन्होंने तय किया था कि बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही छात्रों को धनराशि दी जाएगी। इस मामले में जो घोटाला हुआ है, उसकी जांच भी सीबीआई को बीते दिनों मंत्रालय ने सौंपी है।

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