March 10, 2026

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23 अगस्त चंद्रयान-3: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना भारत, ISRO ने इस साल लिखा एक बड़ा अध्याय

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना भारत
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल एक बड़ा अध्याय लिखा 123 अगस्त को चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ ही चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बन गया। इसके अलावा चांद पर उतरने वाला चौथा देश भी बना। 3 अन्य देश रूस, अमरीका और चीन हैं। लैंडर विक्रम के साथ गए रोवर प्रज्ञान ने चांद की सतह पर 2 सितम्बर तक 100 मीटर से ज्यादा की दूरी तय की और वैज्ञानिक प्रयोग किए।

29 जून : अंतरिक्ष पर्यटन
पहली वाणिज्यिक स्पेस उड़ान

वर्जिन गैलेक्टिक की पहली वाणिज्यक अंतरिक्ष पर्यटन उड़ान सफलतापूर्वक पूरी हुई। इ इसे अंतरिक्ष पर्यटन के दरवाजे खोलने वाला माना गया। 90 मिनट की इस उड़ान में इटली की वायुसेना के 2 कर्नल, एक स्पेस इंजीनियर और एक इंस्ट्रक्टर शामिल था। इसने अमरीका के टैक्सास स्थित अल पासो से उड़ान भरी। इसने 80 फुट की ऊंचाई तक उड़ान भरी। सर रिचर्ड ब्रानसन की कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक 4.5 लाख डॉलर प्रति टिकट की दर से पहले ही 800 अग्रिम टिकट बेच चुकी है।

24 सितम्बर : बेनू के सैंपल
उल्का के नमूने धरती पर लाए

अमरीकी मिशन ओसिरिस-रेक्स ने 24 सितम्बर को उल्का पिंड बेनू से लिए गए सैंपल धरती पर सुरक्षित पहुंचाए। यह पहला मौका था जब पृथ्वी का कोई मिशन किसी उल्का पिंड से सैंपल लेने और उन्हें सुरक्षित धरती पर लाने में सफल हुआ। ओसिरिस ने वर्ष 2020 में बेनू पर टच एंड गोकर सैंपल उठाए थे। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि बेनू के सैंपल इस तथ्य का खुलासा कर सकते हैं कि धरती पर पानी कहां से आया। माना जाता है कि धरती से ऐसा ही एक बड़ा पिंड टकराया था। बेनू उसका हिस्सा हो सकता है।

1 जुलाई : मिशन इकुलिड
डार्क मैटर की खोज हुई शुरू

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने 1 जुलाई को एक व्हाइट एंगल स्पेस टैलीस्कोप इकुलिड लांच किया। यह ब्रह्मांड में मौजूद डार्क मैटर का पता लगाएगा। इसका 600 मैगापिक्सल कैमरा दृश्य प्रकाश के अलावा नियर इन्फ्रारेड स्पैक्ट्रोमीटर और फोटोमीटर का पता लगाने के साथ-साथ आकाश गंगाओं के रेडशिफ्ट का भी आकलन करने में सक्षम है। यह टैलीस्कोप धरती और सूर्य के बीच लैग्रेंज प्वाइंट एल-2 पर स्थापित किया गया है। यह एल-2 पर ई.एस.ए. के एक अन्य टैलीस्कोप गाइया तथा नासा के जैम्स वैब स्पेस टैलीस्कोप के साथ मिलकर काम करेगा।

10 जुलाई : प्लांट हैबीटेट-03
अंतरिक्ष में ताजा सब्जियां

पहले चांद और फिर मंगल पर मानव बस्तियां बसाने के मिशन पर काम हो रहा है मगर वहां ताजा सब्जियां कैसे मिलेंगी। इसका परीक्षण अंतरिक्ष स्टेशन पर हो रहा है।

10 अक्तूबर : 16 साइका मिशन

37 करोड़ कि.मी. की यात्रा शुरू तक इसके चारों ओर क्षुद्र ग्रह 16 साइकी सिर्फ एक जमी बर्फ है या यह लोहे और निक्कल से बना है, इसका पता लगाने के लिए 10 अक्तूबर को नासा ने स्पेसएक्स के फाल्कन हैवी राकेट के जरिए 16 साइकी मिशन लांच किया। यह अगस्त, 2019 चक्कर लगाएगा तथा इस क्षुद्र ग्रह के गुणों का अध्ययन करेगा। 16 साइकी क्षुद्रग्रह हमारे सौरमंडल में पृथ्वी से करीब 37 करोड़ किलोमीटर दूर मंगल और जूपिटर के बीच में मौजूद हैं। यह करीब 226 किलोमीटर चौड़ा है। नासा ने अंतरिक्ष मिशन में ताजा पोषक आहार उपलब्ध कराने के अपने प्रयोगों की दिशा में इस साल एक और ठोस कदम उठाया। 10 जुलाई को प्लांट हेबिटेट-03 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सरसों के परिवार के पौधे एराबाडोप्सिस थालियाना को सफलतापूर्वक उगाया। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष स्टेशन पर लेटूसेस, चीनी गोभी, मस्टर्ड ग्रीन, काले, टमाटर, मूली और मिर्च उगाने का प्रयोग किया जा रहा है।

2 सितम्बर : आदित्य एल-1
भारत ने अपनी पहली सौर वेधशाला लांच की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल 2 सितम्बर को सूर्य के अध्ययन के लिए अपना पहला मिशन आदित्य एल-1 लांच किया। इस सौर वेधशाला को पी.एस.एल.वी.-सी- 57 रॉकेट से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया और उसे इच्छित कक्षा में स्थापित किया गया। यह 30 सितम्बर को पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से निकलकर सूर्य और पृथ्वी के बीच लैग्रॅज प्वाइंट एल-1 की ओर बढ़ा। नए साल में इसके 6 जनवरी को लैग्रेंज प्वाइंट एल-1 पर पहुंचने की उम्मीद है।

 21 अक्तूबर : गगनयान
क्रू मॉड्यूल की परीक्षण उड़ान

इसरो ने 21 अक्तूबर की सुबह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से गगनयान के क्रू मॉड्यूल का सफलतापूर्वक लांच और रेस्क्यू परीक्षण किया। टैस्ट व्हीकल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बनाए गए क्रू मॉड्यूल को 16.5 किलोमीटर ऊपर ले गया। उसके बाद यह अलग हो गया और इसने बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित लैंडिंग की। क्रू मॉड्यूल को भारतीय नौसेना की टीम ने सफलतापूर्वक सुरक्षित प्राप्त किया।

NEWS SOURCE : punjabkesari