April 23, 2026

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370 हटाने पर अमेरिका-रूस समेत 8 देशों ने भारत के कदम को बताया था सही

नई दिल्ली। 5 अगस्त 2019, यही वह तारीख है, जब पीएम नरेंद्र मोदी की केंद्र में बनी दूसरी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए संसद की मंजूरी से संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। इस फैसले से देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति बदल गई और वह पूरी तरह भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया। मोदी सरकार के इस कदम का देश में कुछ पार्टियों ने खूब विरोध किया। पाकिस्तान गला फाड़कर चिल्लाया, लेकिन देश में विरोध करने वालों के साथ पाकिस्तान की चीख-पुकार को किसी ने तरजीह नहीं दी। सिर्फ 2 देशों ने ही इस मसले पर पाकिस्तान का समर्थन किया।

अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, श्रीलंका, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब ने 370 हटाने के मोदी सरकार के फैसले का साथ दिया था। गौर करने की बात है कि सऊदी अरब पाकिस्तान का करीबी माना जाता है। जबकि, बांग्लादेश और अफगानिस्तान भी इस्लामी देश हैं। बावजूद इसके इन देशों ने पाकिस्तान को ठेंगा दिखाते हुए कहा था कि ये भारत का आंतरिक मसला है और 370 हटाने का उसका फैसला सही है।

अमेरिका और रूस भी इस मसले पर मोदी सरकार के साथ खड़े हुए थे। फ्रांस और ब्रिटेन ने भी कहा था कि भारत एक संप्रभु देश है और उसे अपने हक में फैसले लेने की आजादी है। जर्मनी ने हालांकि बीच का रास्ता अख्तियार किया था, लेकिन उसने भी कहा था कि जम्मू-कश्मीर में हालात बदलने की जरूरत है। इसके अलावा जर्मनी ने भारत के कदम के खिलाफ कोई बात नहीं कही थी।

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि कम से कम इस्लामी देश 370 हटाने के मसले पर उसके विरोध का साथ देंगे, लेकिन सिर्फ तुर्की और मलेशिया सरकारों ने उसके सुर में सुर मिलाया था। दोनों देशों ने मोदी सरकार के इस कदम की आलोचना की थी। वहीं, पाकिस्तान के सबसे बड़े दोस्त चीन ने भी उसे ठेंगा दिखा दिया था। चीन ने सिर्फ लद्दाख को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने का विरोध किया था। बाकी उसने भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने की ही बात कही थी।

तो इस तरह 370 पर पाकिस्तान जो हाय-तौबा मचा रहा था, उसका पर्दा गिर गया। इस ऐतिहासिक घटना को हुए दो साल बीत गए हैं और 370 को लेकर अब न देश में चर्चा होती है और न ही विदेश में। बस पाकिस्तान कभी-कभी इस मुद्दे पर रोता है, लेकिन उसको कोई पुचकारता नहीं है।

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