April 17, 2026

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दिल्ली के एलजी वी.के. सक्सेना के मानहानि मामले में मेधा पाटकर दोषी करार, 30 मई को होगी सजा पर बहस

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि मामले में अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर को दोषी ठहराया है। अब इस मामले में सजा पर बहस 30 मई को होगी। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने मेधा पाटकर के खिलाफ साल 2001 में यह मामला दर्ज कराया था, उस समय वह अहमदाबाद स्थित एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे।

दिल्ली की साकेत कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने मेधा पाटकर को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 500 के तहत आपराधिक मानहानि के अपराध के लिए दोषी करार दिया। इसके तहत मेधा पाटकर को दो साल की जेल या जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। आपको बता दें कि मेधा पाटकर ने 25 नवंबर 2000 को “देशभक्त का असली चेहरा” शीर्षक वाले एक प्रेस नोट में कहा था कि वी.के. सक्सेना देशभक्त नहीं, कायर हैं। इसके अलावा पाटकर ने सक्सेना पर हवाला लेन-देन में शामिल होने समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे।

साकेत कोर्ट के जज ने कहा कि पाटकर ने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से वी.के. सक्सेना के नाम को खराब करने की कोशिश की और इससे उनकी प्रतिष्ठा और साख को काफी नुकसान पहुंचा। अदालत ने कहा, शिकायतकर्ता को देशभक्त नहीं, कायर कहना और हवाला लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाना मानहानिकारक था। जज ने कहा, पाटकर द्वारा सक्सेना पर लगाया गया ये आरोप कि वो गुजरात के लोगों के संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रख रहे थे, उनकी ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा पर सीधा हमला था। अदालत ने अपने आदेश में कहा, सार्वजनिक क्षेत्र में जहां देशभक्ति को अत्यधिक महत्व दिया जाता है, ऐसे आरोप विशेष रूप से गंभीर हैं। किसी की राष्ट्रीय निष्ठा पर सवाल उठाने से उसकी सार्वजनिक छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है।