आरएसएस के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर लगा प्रतिबंध खत्म, जानिए किसने लगाया था बैन
नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारी अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों में शामिल हो सकेंगे। 58 साल पहले लगाए गए प्रतिबंध को मोदी सरकार ने खत्म कर दिया। 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सरकारी कर्मचारियों के संघ के कार्यक्रमों में शामिल होने पर रोक लगा दी थी। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में 9 जुलाई को आदेश भी जारी कर दिया गया। इस आदेश के अनुसार 30 नवबंर 1966, 25 जुलाई 1970 और 28 अक्टूबर 1980 के उन आदेशों में संशोधन किया गया है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस के कार्यक्रमों में शामिल होने पर रोक लगाई गई थी।
इस संबंध में 1966 आदेश जारी करते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तर्क दिया गया था कि आरएसएस राजनीतिक रूप से प्रभावित है इसलिए इसके कार्यक्रमों में शामिल होने से कर्मचारियों की तटस्थता प्रभावित हो सकती है। इसके बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो इस कानून को निरस्त कर दिया गया था, लेकिन जब 1980 में इंदिरा गांधी फिर से सत्ता में लौटीं तो इस दोबारा इसे लागू कर दिया था। वहीं, बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, 58 साल पहले 1966 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने वाले सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने वाले असंवैधानिक आदेश को मोदी सरकार ने वापस ले लिया है। मूल आदेश पहले ही पारित नहीं किया जाना चाहिए था।
अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि 7 नवंबर 1966 को संसद पर बड़े पैमाने पर गौ-हत्या विरोधी विरोध प्रदर्शन हुआ था। आरएसएस-जनसंघ ने लाखों की संख्या में समर्थन जुटाया। पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गये। 30 नवंबर 1966 को, आरएसएस-जनसंघ के प्रभाव से आहत होकर, इंदिरा गांधी ने सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया।
