बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने मुक्ति युद्ध के नायकों के आश्रितों के लिए आरक्षण 30 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी किया, छात्रों का उग्र आंदोलन अब खत्म होने की उम्मीद
ढाका। बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन के बीच वहां के सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण मामले में सुनवाई के बाद फैसला दिया है कि मुक्ति युद्ध के नायकों के आश्रितों को 30 फीसदी की जगह 7 फीसदी ही आरक्षण दिया जाएगा। पहले हाईकोर्ट ने इन आश्रितों की अर्जी पर 30 फीसदी आरक्षण देने का फैसला सुनाया था। जिसके बाद ही बांग्लादेश में छात्र आरक्षण विरोधी आंदोलन पर उतर आए थे। छात्रों ने जमकर हिंसा की थी। जिसके बाद बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लगाकर कानून और व्यवस्था का जिम्मा सेना को सौंप दिया था। आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में अब तक 133 लोगों की जान जा चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट से फैसले से आरक्षण के खिलाफ आंदोलन खत्म होने की संभावना बनी है।
मुक्ति युद्ध के नायकों को आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण देने का विरोध ये कहकर हो रहा था कि उनकी उम्र तो सरकारी नौकरी पाने लायक बची नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना था कि मुक्ति युद्ध के नायकों के परिजनों को पीढ़ी दर पीढ़ी इतना आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। वहीं, इस मामले में पीएम शेख हसीना के बयान से छात्र और भड़क गए थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने ये कह दिया था कि मुक्ति युद्ध के नायकों के आश्रितों को आरक्षण न दिया जाए, तो क्या पाकिस्तान की मदद करने वाले रजाकारों के परिजनों को दिया जाएगा? बांग्लादेश में बीते दिनों हिंसा के दौरान सरकारी टीवी स्टेशन के दफ्तर और एक जेल तक को आग के हवाले कर दिया गया था। जेल से सैकड़ों कैदी भी आंदोलनकारियों ने रिहा करा दिए थे। वहीं, पुलिस की आंदोलनकारियों पर फायरिंग में तमाम लोगों की जान गई और हजारों घायल हुए।
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण को कम किए जाने के फैसले के बाद अब वहां शांति स्थापना की उम्मीद है। बांग्लादेश के छात्रों के आंदोलन के दौरान जिस पैमाने पर हिंसा हुई, उससे पड़ोसी भारत को भी काफी चिंता हो गई थी। भारत के उच्चायोग ने बड़ी कोशिश की और बांग्लादेश में पढ़ने वाले करीब 1000 छात्रों की सकुशल वापसी कराई। माना जा रहा है कि अभी भी बांग्लादेश में करीब 15000 भारतीय नागरिक हैं।
