April 26, 2026

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नीतीश कुमार सरकार को बड़ा झटका, बिहार में अभी लागू नहीं हो सकेगा 65 फीसदी आरक्षण

नई दिल्ली। आरक्षण बढ़ाने के मामले में बिहार की नीतीश कुमार सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में आरक्षण को बढ़ाकर 65 फीसदी करने के सरकार के फैसले पर लगी पटना हाईकोर्ट की रोक को हटाने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो अब सितंबर में इस मामले पर सुनवाई करेगा। बिहार में सीएम नीतीश कुमार ने कांग्रेस और आरजेडी के साथ सरकार में रहते वक्त जातिगत सर्वे कराया था। उस जातिगत सर्वे के नतीजे आने के बाद उन्होंने बिहार में आरक्षण को बढ़ाकर 65 फीसदी करने का कानून विधानसभा में पास कराया था।

नीतीश कुमार सरकार की तरफ से आरक्षण को बढ़ाकर 65 फीसदी किए जाने को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के कदम पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ नीतीश कुमार की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उनको राहत नहीं मिल सकी है। अब सितंबर में विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट अगर बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने को मंजूरी देता है, तभी ये बिहार में लागू हो सकेगा। बता दें कि अभी एससी, एसटी और ओबीसी को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 50 फीसदी आरक्षण मिलता है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में कमजोर वर्ग के सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था मोदी सरकार ने की थी। इस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने सही बताया था।

सुप्रीम कोर्ट पहले तमाम फैसलों में कह चुका है कि संविधान के प्रावधान के तहत आरक्षण का कोटा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता। इसी आधार पर कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय को दिया गया अतिरिक्त आरक्षण भी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था। इसके बावजूद नीतीश कुमार सरकार ने जातिगत सर्वे कराकर बिहार विधानसभा में बिल पास कराया और 65 फीसदी तक आरक्षण देने का एलान किया था।