June 30, 2026

Hind foucs news

hindi new update

डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ‘लक्ष्मी’ बनीं कमला हैरिस!, 1 ही हफ्ते में जुटाया इतना पैसा कि जानकर हैरत में पड़ जाएंगे आप

वॉशिंगटन। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी से मौजूदा उप राष्ट्रपति कमला हैरिस इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। कमला हैरिस का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से है। ट्रंप बड़े कारोबारी भी हैं। जाहिर तौर पर उनके पास धन की कमी नहीं है। वहीं, अब खबर ये है कि राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए कमला हैरिस भी खूब धन जुटा रही हैं। माता लक्ष्मी को कमला भी कहा जाता है। ऐसे में कमला हैरिस अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए फिलहाल लक्ष्मी का स्वरूप बनी हुई हैं। कमला हैरिस को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के बाद से डेमोक्रेटिक पार्टी के पास खूब फंड आ रहा है। कमला हैरिस को 1 हफ्ते में ही 200 मिलियन डॉलर यानी करीब 16 अरब रुपए का चंदा मिल चुका है।

कमला हैरिस की प्रचार टीम ने बताया कि डेमोक्रेटिक प्रत्याशी को 66 फीसदी से ज्यादा दान पहली बार चंदा देने वालों ने दिया है। इसके अलावा 170000 से ज्यादा वॉलेंटियर्स भी डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं, ताकि वे कमला हैरिस को अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव जितवा सकें। वहीं, कमला हैरिस के मुकाबले उतरे डोनाल्ड ट्रंप की बात करें, तो जुलाई की शुरुआत में उनकी प्रचार टीम ने बताया था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने दूसरी तिमाही में 331 मिलियन डॉलर यी करीब 25 अरब रुपए जुटाए हैं। इससे पहले मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन ने फिर चुनाव लड़ने के लिए 264 मिलियन डॉलर यानी करीब 20 अरब रुपए जुटा लिए थे। यानी आंकड़ों के हिसाब से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए फंड जुटाने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप अब भी कमला हैरिस से आगे हैं, लेकिन अगर बाइडेन और कमला हैरिस के संयुक्त फंड को देखें, तो वो ट्रंप से ज्यादा है।

कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए कांटे का चुनाव होने के आसार हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव नवंबर में होना है। ऐसे में 100 दिन से भी कम का वक्त बचा है। पिछले हफ्ते जो ओपिनियन पोल हुआ था, उसमें बताया गया था कि कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर दिख सकती है। हालांकि, अगर टीवी पर ट्रंप और कमला हैरिस की बहस हुई, तो उसके बाद ही ये साफ हो सकेगा कि कौन अपनी नीति से अमेरिका के लोगों को खुद की तरफ खींचने में सफल रहता है।