उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार को समर्थन देने के लिए रखी शर्त, जानिए क्या चाहते हैं महाराष्ट्र के पूर्व सीएम
मुंबई। शिवसेना के दूसरे गुट के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने एक शर्त पर मोदी सरकार का समर्थन करने की बात कही है। ये जानकर आप हैरान जरूर होंगे। उद्धव ठाकरे अभी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन उनका कहना है कि अगर मोदी सरकार आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से ज्यादा करने का कानून लाती है, तो उनके गुट के सांसद इस कानून का समर्थन करेंगे। बिहार में आरक्षण को 50 से 65 फीसदी किए जाने पर पटना हाईकोर्ट की रोक और उस पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे देने से इनकार के बाद उद्धव ठाकरे का ये बयान आया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा बढ़ाने का अधिकार नहीं है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार संसद के रास्ते आरक्षण की सीमा बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को आरक्षण के मसले के हल के लिए फैसला लेना चाहिए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि फैसले को हम भी स्वीकार करेंगे। उद्धव ठाकरे ने बिहार में बढ़ाए गए आरक्षण पर पटना हाईकोर्ट की रोक के बारे में कहा कि सत्ता में बैठी पार्टियों को साफ करना चाहिए कि क्या वे ओबीसी के हितों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं?
बता दें कि कांग्रेस और आरजेडी के साथ जब नीतीश कुमार बिहार में सरकार चला रहे थे, तब उन्होंने जातिगत सर्वे कराया था। इस सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार में आरक्षण की सीमा 50 से बढ़ाकर 65 फीसदी करने का कानून पास कराया था। इसके खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका आई, तो कोर्ट ने बढ़ाए गए आरक्षण पर रोक लगा दी। नीतीश कुमार की सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद नीतीश कुमार की जेडीयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने ये मांग की थी कि बिहार विधानसभा से पास आरक्षण बढ़ाने के कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाला जाए। ताकि कोर्ट उस कानून की समीक्षा न कर सके।
हालांकि, उन्होंने इस मामले में मोदी सरकार पर कोई दबाव डाले जाने की खबरों को गलत बताया था। अब उद्धव ठाकरे के बयान से साफ है कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने के मामले में सहयोगी दलों के साथ ही विपक्ष भी दबाव बनाने लगा है। राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना की भी मांग कर रहे हैं। ऐसे में अगर मोदी सरकार आरक्षण बढ़ाने के मसले पर कोई कदम नहीं उठाती, तो बीजेपी को दलित और पिछड़ा विरोधी बताने की विपक्ष ने जो रणनीति अपना रखी है, वो और नुकसान पहुंचा सकती है।
