वक्फ एक्ट में संशोधन कर इसका नाम बदलने जा रही मोदी सरकार, मुस्लिम महिलाओं और गैर मुस्लिमों को भी बोर्ड में मिलेगी जगह
नई दिल्ली। मोदी सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही वक्फ एक्ट में संशोधन का बिल लाने जा रही है। बिल का ड्राफ्ट लोकसभा के सांसदों को भेजे जाने की खबर है। जानकारी के मुताबिक वक्फ एक्ट के नाम में भी संशोधन होगा। वक्फ एक्ट 1995 के नाम में बदलाव कर इसे ‘यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफीशिएंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट’ का नाम भी मोदी सरकार देने जा रही है। वक्फ एक्ट में बदलाव के तहत वक्फ बोर्डों में मुस्लिम महिलाओं और गैर मुस्लिमों को भी जगह दिए जाने का प्रावधान किया जाएगा।
वक्फ एक्ट में संशोधन के तहत बिल में बोहरा और आगाखानी समुदायों के लिए अलग औकाफ बोर्ड बनाने का भी प्रस्ताव है। बिल में शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी और अन्य पिछड़े वर्गों का वक्फ बोर्डों में प्रतिनिधित्व का भी प्रावधान मोदी सरकार ने किया है। बिल में केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के जरिए वक्फ के रजिस्ट्रेशन को भी व्यवस्थित करने का प्रावधान है। संसद से बिल पास होने पर किसी की भी संपत्ति वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज करने से पहले संबंधित लोगों को नोटिस के अलावा राजस्व संबंधी कानूनों के पालन की लंबी प्रक्रिया होगी। मोदी सरकार ने बिल में ये प्रावधान इस वजह से किया है, ताकि सरकार के पास वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की ताकत हो, तो विवादों से बचा जा सकेगा। अगर वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन होगा, तो इसे गलत तरीके से खरीदा या बेचा भी नहीं जा सकेगा। इस संपत्ति का इस्तेमाल गरीब मुस्लिमों की भलाई के लिए भी हो सकेगा।
मोदी सरकार की तरफ से वक्फ एक्ट में संशोधन की कोशिश का मुस्लिम नेता, धर्मगुरु और संगठन विरोध कर रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे असंवैधानिक बताकर कोर्ट तक ले जाने की धमकी दी है। दरअसल, वक्फ एक्ट को ही खत्म करने की मांग लंबे समय से हो रही है। अभी वक्फ बोर्डों के पास किसी भी संपत्ति को अपना बताकर कब्जा करने की पूरी ताकत है। इस मामले में अदालतें भी कुछ नहीं कर पातीं। ऐसे में तमाम संपत्तियों के कारण लोगों और वक्फ बोर्डों में विवाद चल रहा है। तमिलनाडु के एक गांव को ही वक्फ बोर्ड ने अपना बता दिया है। जबकि, वहां 1500 साल पुराना मंदिर भी है। गांव के एक व्यक्ति ने जब अपनी जमीन बेचनी चाही, तब इसका खुलासा हुआ। ऐसे ही तमाम और विवाद के मामले देशभर में हैं। देश में 30 वक्फ बोर्ड हैं और इनके पास संपत्ति 900000 एकड़ के आसपास है। इस तरह सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्डों के पास है। इस जमीन पर दिल्ली जैसे 3 शहर बसाए जा सकते हैं।
