‘भारत की सिर्फ ये जिम्मेदारी नहीं कि अपनी आजादी का बचाव करे…’, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से हिंसा पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का अहम बयान
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने भी 78वें स्वतंत्रता दिवस पर संघ के मुख्यालय में झंडारोहण किया। झंडारोहण के बाद मोहन भागवत ने संघ के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान बांग्लादेश में हुई हिंसा का जिक्र कर चिंता जताई।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पड़ोसी देश में काफी गड़बड़ी हुई है। वहां रहने वाले हिंदू भाइयों को बिना किसी दोष के हिंसा झेलनी पड़ी है। मोहन भागवत ने कहा कि भारत की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी नहीं है कि वो आजाद रहे और खुद का बचाव करे, बल्कि हमारी संस्कृति है कि दुनिया की भलाई के लिए खुद को उसी तरह ढालें। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि पिछले कई साल में आप सभी ने देखा होगा कि हमने किसी पर भी हमला नहीं किया। जहां भी कोई मुश्किल में रहा, हमने उनकी मदद की।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ये भी कहा कि हमने आजादी के 78 साल पूरे कर लिए हैं। आजादी के लिए अनगिनत लोगों ने अपने जीवन का बलिदान किया। मोहन भागवत ने कहा कि जिस समाज को बनाने के लिए उन लोगों ने अपना सबकुछ न्योछावर किया, वो देश में बन चुका है। जिस पीढ़ी ने स्वतंत्रता हासिल करने के लिए लड़ाई लड़ी वे अब नहीं हैं, लेकिन उनके बाद की पीढ़ी ने इस आजादी की सुरक्षा की है। मोहन भागवत के आरएसएस प्रमुख बनने के बाद से ही संघ के मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराने का कार्यक्रम शुरू हुआ। संघ ने इससे पहले देश की तमाम मुश्किलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा जरूर लिया। हाल ही में केरल में जब आपदा ने सैकड़ों लोगों की जान ली और हजारों को बेघर किया, उस वक्त भी आरएसएस के स्वयंसेवकों ने वहां सेवा की और लोगों के लिए राहत शिविर चलाकर उनको भूखा नहीं रहने दिया। कोरोना काल में भी संघ ने आम लोगों और गरीबों की हर पीड़ा के दौरान साथ निभाया था।
