जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मेनिफेस्टो पर उठा विवाद, शंकराचार्य मंदिर का नाम बदलने पर कश्मीरी पंडितों ने जताई आपत्ति
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव से पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के मेनिफेस्टो पर विवाद खड़ा हो गया है। कश्मीरी पंडितों ने पार्टी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मेनिफेस्टो में प्राचीन शंकराचार्य मंदिर का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान और हरी पर्वत का नाम बदलकर कोह-ए-मारां कर दिया है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि यह हिंदू इतिहास को मिटाने की साजिश है, जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस मसले को लेकर बीजेपी भी नेशनल कॉन्फ्रेंस पर हमलावर हो गई है। बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, “शंकराचार्य मंदिर का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान करना पार्टी द्वारा धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास है। नेशनल कॉन्फ्रेंस कश्मीर के मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए इस प्रकार की राजनीति कर रही है।”
वहीं, इस विवाद पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सीनियर नेता नासिर असलम वानी ने कहा, “हमारी पार्टी किसी भी धर्म की राजनीति नहीं करती है। हमने कोई नाम नहीं बदला है, और हमारा नारा है ‘हिंदू, मुस्लिम, सिख इत्तिहाद।’ हम सभी धर्मों को साथ लेकर चलते हैं और कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए हमेशा प्रयासरत रहे हैं।”
पार्टी के सीनियर नेता जुनैद अजीम मट्टू ने भी इस मुद्दे पर कहा, “शंकराचार्य मंदिर को तख्त-ए-सुलेमान कहा जाए या हरी पर्वत को कोह-ए-मारां, यह व्यक्तिगत पसंद की बात है। इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए। जैसे प्रयागराज और इलाहाबाद दोनों के अपने-अपने इतिहास हैं, वैसे ही तख्त-ए-सुलेमान और शंकराचार्य मंदिर का भी है।”
