June 1, 2026

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चीन के कर्ज के जाल में मालदीव के फंसने की आशंका, कम्युनिस्ट देश से 1.3 अरब डॉलर का कर्ज लेने के बाद फिर किया वित्तीय मदद का समझौता

माले। चीन के कर्ज के जाल में अब मालदीव फंस सकता है। मालदीव पर 1.3 अरब डॉलर का चीन से मिला कर्ज पहले से ही है। अब मालदीव ने चीन के साथ और ज्यादा वित्तीय मदद का समझौता किया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना इस समझौते के तहत मालदीव में व्यापार और निवेश को मजबूती मिलने की बात कह रहा है। जानकारी के मुताबिक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और मालदीव के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच वित्तीय मदद का समझौता हुआ है। इसमें प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा और चालू खाता लेन-देन को चीन और मालदीव की मुद्रा में निपटाने की व्यवस्था है।

चीन की सरकार का कहना है कि वो अपनी क्षमता के मुताबिक मालदीव में आर्थिक और सामाजिक विकास में सहयोग जारी रखेगा। चीन से पहले ही मालदीव ने काफी कर्ज ले रखा है। ताजा वित्तीय समझौते के तहत अब चीन की तरफ से मालदीव को मिलने वाले पैसे से इस्लामी देश को राहत जरूर मिले, लेकिन लंबे समय में ये कर्ज और वित्तीय मदद उसके गले में फांस बन सकता है। मालदीव को अक्टूबर में 25 मिलियन डॉलर के कर्ज का भुगतान भी करना है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन के करीबी माने जाते हैं। मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू सबसे पहले चीन के ही दौरे पर गए थे। उन्होंने भारत के खिलाफ भी कदम उठाए थे।

मुइज्जू की सरकार के कई मंत्रियों ने पीएम नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें जारी होने के बाद अनाप-शनाप बातें भी की थीं। इसके बाद मालदीव और भारत के बीच रिश्ते और बिगड़ गए। हालांकि, पीएम मोदी ने अपने तीसरे शपथग्रहण में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को भी न्योता दिया था। मुइज्जू दिल्ली भी आए थे। वहीं, भारतीय पर्यटकों ने मालदीव से दूरी बनाए रखी है। जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। मालदीव जाने वाले पर्यटकों में पहले भारतीयों का दूसरा स्थान हुआ करता था। बता दें कि चीन के कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका पहले ही बर्बादी के कगार पर पहुंचा था। उसकी मदद भारत ने की और फिलहाल वहां हालात काबू में हैं।