रतन टाटा ने बिजनेस को बुलंदी तक पहुंचाने के साथ मुश्किल वक्त में देश का भी हमेशा दिया साथ
मुंबई। पद्म विभूषण और प्रख्यात उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार को 87 साल की उम्र में निधन हो गया। रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और देश पर आई तमाम मुसीबतों के दौरान काफी मदद भी की। स्टील से लेकर सॉफ्टवेयर और फोर्ड जैसी दुनिया की बड़ी कार कंपनी के अधिग्रहण से लेकर रतन टाटा के दौर में टाटा ग्रुप ने तमाम उद्योगों से भारत की अर्थव्यवस्था को चार चांद लगाए।
साल 1937 में रतन टाटा का जन्म हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए और फिर 10 साल की उम्र तक रतन टाटा का पालन-पोषण उनकी दादी ने किया। रतन टाटा साल 1955 में इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर की पढ़ाई करने अमेरिका भेजे गए। वो साल 1962 में भारत लौटे और टाटा ग्रुप में सहायक के छोटे से ओहदे पर नियुक्त हुए। सहायक के तौर पर रतन टाटा को जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील के कारखाने की भट्टियों पर भी काम करना पड़ा। यहीं उन्होंने काम की बारीकियां सीखीं। फिर 1974 में रतन टाटा को टाटा संस में बतौर डायरेक्टर लिया गया। रतन टाटा साल 1981 में टाटा संस के चेयरमैन बने। फिर 1991 में वो टाटा संस के साथ टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाए गए। रतन टाटा इससे पहले 1986 से 1989 तक एयर इंडिया के अध्यक्ष भी रहे। पिछले साल ही रतन टाटा ने भारत सरकार से एयर इंडिया को खरीदा था। 2008 में रतन टाटा को पद्म विभूषण सम्मान दिया गया था। उम्र बढ़ने के कारण उन्होंने टाटा ग्रुप का कामकाज 2012 में देखना बंद किया, लेकिन निधन तक वो टाटा संस के मानद अध्यक्ष बने रहे।
रतन टाटा को विमान उड़ाने का बहुत शौक था। यहां तक कि उन्होंने 2008 में 69 साल की उम्र में अमेरिका में बने एफ-18 हॉर्नेट लड़ाकू विमान को भी उड़ाया था। दुनिया की मशहूर कार निर्माता फोर्ड के ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण करने वाले रतन टाटा ने भारत के आम लोगों को नैनो और इंडिका नाम की छोटी कारें तैयार कर दीं। खास बात ये है कि जब उनका कार का बिजनेस सही नहीं चल रहा था, तो वो फोर्ड को ही कंपनी बेचना चाहते थे, लेकिन कंपनी के चेयरमैन बिल फोर्ड ने उनसे अहसान करने वाली बात कही। ये बात रतन टाटा को चुभ गई और उन्होंने कार बनाने का बिजनेस बंद न करने का फैसला किया और आखिरकर फोर्ड का भी अधिग्रहण कर लिया। रतन टाटा के दौर में टाटा ग्रुप ने जबरदस्त ऊंचाई छुई।
टीसीएस जैसी दुनिया की नामचीन सॉफ्टवेयर कंपनी भी रतन टाटा के दौर में शुरू हुई। रतन टाटा ने साल 2004 में ‘ऐतबार’ नाम की फिल्म भी बनाई थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन थे। फिल्म सफल नहीं हुई। जिसके बाद रतन टाटा ने फिर कोई फिल्म नहीं बनाई। रतन टाटा मुश्किल घड़ी में हमेशा देश के साथ खड़े रहे। कोरोना के वक्त उन्होंने 500 करोड़ रुपए सरकार को दिए थे। रतन टाटा को कुत्तों से बहुत प्यार था। मुंबई में उन्होंने कुत्तों के इलाज के लिए 5 मंजिला अस्पताल बनवाया और यहां तक कि एक कुत्ते का कूल्हा जब टूट गया, तो अमेरिका ले जाकर उसका हिप रिप्लेसमेंट भी कराया।
