अब तेलंगाना सरकार नवंबर में कराने जा रही जातिगत सर्वे, जानिए बिहार में नीतीश कुमार ने जब कराया तो उसका क्या हुआ हाल?
हैदराबाद। बिहार के बाद अब तेलंगाना सरकार जातिगत सर्वे कराने जा रही है। तेलंगाना सरकार के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। तेलंगाना सरकार की तरफ से जातिगत सर्वे 6 नवंबर से 30 नवंबर तक कराया जाएगा। पोन्नम प्रभाकर ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीएम रेवंत रेड्डी को जातिगत सर्वे कराने के लिए कहा था। राहुल गांधी के निर्देश पर तेलंगाना सरकार इसे करा रही है। तेलंगाना सरकार के मंत्री पोन्नम रेड्डी ने ये भी कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जातिगत सर्वे कराने का कांग्रेस ने वादा किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद देशभर में जातिगत सर्वे कराया जाएगा।
तेलंगाना की कांग्रेस सरकार की तरफ से जातिगत सर्वे कराने के फैसले की खास बात ये है कि दो दिन पहले ही मीडिया में खबरें आई थीं कि केंद्र की मोदी सरकार 2025 से जनगणना कराने वाली है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने काफी दिनों से जाति का मुद्दा उठा रखा है। वो अन्य विपक्षी नेताओं के साथ जातिगत जनगणना कराने की मांग केंद्र सरकार से कर रहे हैं। अब तक जितनी भी जनगणना हुई, उसमें अनुसूचित जाति और जनजाति व ओबीसी के बारे में जानकारी जुटाई जाती रही है। कांग्रेस और विपक्षी दलों की मांग है कि जनगणना में पता किया जाए कि किस जाति की कितनी आबादी है और उसी के अनुरूप उनको सरकारी योजनाओं में हिस्सा दिया जाए।
बता दें कि इससे पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने जातिगत सर्वे कराने के बाद उसके आंकड़े जारी किए थे। इसके बाद नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में इस जातिगत सर्वे के आंकड़ों के हिसाब से आरक्षण बढ़ाने संबंधी बिल भी पास कराया था, लेकिन पहले पटना हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण बढ़ाने की नीतीश कुमार सरकार की कोशिश पर स्टे लगा दिया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा था कि आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता। अगर 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण देना है, तो सरकार को संविधान संशोधन करना होगा।
