April 25, 2026

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विरोध-प्रदर्शन कराने, धर्मांतरण, कट्टरपंथियों से संपर्क रखने वाले एनजीओ की खैर नहीं, गृह मंत्रालय ने एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का किया एलान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अब तमाम एनजीओ की तरफ भौंहें टेढ़ी कर ली हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय अब सख्त एक्शन की तैयारी में है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को अपनी वेबसाइट पर एनजीओ के लिए नोटिस जारी किया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे किसी भी एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया जाएगा, जो विकास विरोधी गतिविधि, धर्मांतरण या दुर्भावना वाले इरादे से विरोध-प्रदर्शन कराते हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे एनजीओ पर भी कार्रवाई होगी, जिनके संबंध आतंकवादी और कट्टरपंथी समूहों से हैं।

गृह मंत्रालय ने एक्शन की जद में उन एनजीओ को भी रखा है, जिनके विदेश से चंदा लेने से धार्मिक और सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ सकता है। जबरन धर्मांतरण कराने में जुटे एनजीओ पर भी केंद्र सरकार अब कार्रवाई करेगी। गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ऐसे एनजीओ पर भी एक्शन होगा, जो लक्ष्य के तहत विदेशी चंदे का इस्तेमाल न करता हो और सालाना रिटर्न दाखिल न करने वाले एनजीओ पर भी कार्रवाई होगी। पिछले दो-तीन साल में काम न करने वाले एनजीओ पर भी एक्शन की बात गृह मंत्रालय के नोटिस में कही गई है।

गृह मंत्रालय के नोटिस के मुताबिक ऐसे एनजीओ पर भी एक्शन होगा, जो मांगा गया स्पष्टीकरण नहीं देंगे। साथ ही किसी पदाधिकारी या सदस्य पर अगर इस मामले में केस दर्ज होता है, तो भी एनजीओ के खिलाफ गृह मंत्रालय कार्रवाई करेगा। ऐसे सभी एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया जाएगा। एफसीआरए का मतलब विदेशी अंशदान नियामक कानून है। इसके लाइसेंस के बिना कोई भी एनजीओ विदेश से चंदा नहीं ले सकता। एफसीआरए का लाइसेंस गृह मंत्रालय ही देता है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कई एनजीओ के खिलाफ गृह मंत्रालय ने ऐसी ही कार्रवाई की थी। उनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने के साथ ही भारत में कामकाज पर भी रोक लगा दी गई थी। साल 2016 में ही 20 हजार एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द किए गए थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को भी कार्रवाई की जद में आना पड़ा था और भारत में उसका कामकाज बंद हो गया।