April 20, 2026

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महाविकास अघाड़ी को बाय-बाय बोलेंगे उद्धव ठाकरे?, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हुई है गठबंधन की दुर्गति

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी को सत्तारूढ़ महायुति ने जोरदार पटकनी दी है। महाविकास अघाड़ी में शामिल उद्धव ठाकरे की शिवसेना-यूबीटी, कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी में से किसी को इतनी सीट भी नहीं मिलीं कि महाराष्ट्र विधानसभा में उनका नेता विपक्ष बन सके। अब इन सबके बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि उद्धव ठाकरे पर उनकी पार्टी के नेताओं का दबाव है कि वो महाविकास अघाड़ी को बाय-बाय बोल दें! सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे की पार्टी के नेता कह रहे हैं कि महाविकास अघाड़ी में रहने का शिवसेना-यूबीटी को कोई फायदा नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे को पार्टी नेताओं ने ये भी कहा है कि बीएमसी और अन्य चुनावों में वो अकेले दम पर प्रत्याशी उतारें।

महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार पहले बनी तो थी, लेकिन एकनाथ शिंदे की बगावत के कारण ज्यादा दिन नहीं चल सकी। वहीं, अजित पवार ने भी एनसीपी में बगावत कर अपने चाचा शरद पवार की सियासी हालत इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पतली कर दी है। नतीजों पर गौर करें, तो उद्धव ठाकरे की पार्टी महज 20 सीटें ही हासिल कर सकी। जबकि, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 सीटें जीतीं। वहीं, अजित पवार की एनसीपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 41 सीटों पर कब्जा जमाया। जबकि, उनके चाचा शरद पवार के एनसीपी गुट को सिर्फ 10 सीटों पर ही जीत हासिल हुई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 100 से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन जीते सिर्फ 16 ही। ऐसे में उसकी भी दुर्गति हुई है।

वहीं, महायुति की जीत पर नजर डालें, तो बीजेपी ने अपने दम पर महाराष्ट्र विधानसभा की 132 सीटों पर जीत दर्ज की है। उसका स्ट्राइक रेट 90 फीसदी रहा है। जबकि, बीजेपी 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे का साथ लेकर 105 सीट ही जीत सकी थी। 2014 में बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा की 122 सीट अपने नाम की थी। साल 2014 और 2019 में शिवसेना और एनसीपी अविभाजित थीं। अब अगर उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी से अलग होने का फैसला करते हैं, तो इससे विपक्षी गठबंधन को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, ऐसा कदम उठाकर भी उद्धव ठाकरे क्या हासिल कर पाएंगे, इस पर संशय है।