नैक घूसखोरी मामले में जेएनयू प्रोफेसर समेत 10 लोगों को सीबीआई ने किया गिरफ्तार
नई दिल्ली। NAAC की रेटिंग दिलाने के लिए घूसखोरी के मामले में सीबीआई ने जेएनयू के एक प्रोफेसर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में नैक के 7 लोग भी हैं। नैक की रेटिंग के आधार पर ही भारत में सभी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का स्तर पता चलता है। ज्यादा रेटिंग वाले संस्थानों में पढ़ाई उच्चस्तर की मानी जाती है और इनमें पढ़ने वाले छात्रों के लिए फीस भी ज्यादा होती है। नैक में घूसखोरी के मामले में गिरफ्तारियों के बाद बयान में सीबीआई ने कहा है कि उसने दिल्ली, नोएडा, चेन्नई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा, पलामू, संबलपुर, भोपाल, बिलासपुर में छापा मारा। जांच एजेंसी के मुताबिक उसे 37 लाख नकद, 6 लैपटॉप, एक आईफोन 16 और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।
सीबीआई ने अपने बयान में कहा कि नैक के इस मामले में सोना, लैपटॉप, नकद और मोबाइल फोन के रूप में घूस लिया गया। आरोप है कि गुंटूर के एक शिक्षण संस्थान ने अपने पक्ष में नैक रेटिंग अच्छी लेने के लिए नैक की इंस्पेक्शन टीम के लोगों को ये घूस दी। सीबीआई के मुताबिक नैक घूसखोरी कांड में अभी उसकी जांच जारी है। उधर, सीबीआई ने 400 करोड़ की पोंजी स्कीम के जरिए धोखाधड़ी करने वाले मास्टरमाइंड दीपांकर बर्मन के खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की है। उसने डीबी स्टॉक कंसलटेंसी नाम की फर्म बनाकर धोखाधड़ी की थी। सीबीआई ने इस मामले में बताया कि चार आरोपियों मोनालिसा दास, छबिन बर्मन, दीपाली तालुकदार और मुकेश अग्रवाल के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
ये सभी आरोपी केस का सामना कोर्ट में कर रहे हैं। गुवाहाटी के कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि छबिन बर्मन को 27 अक्टूबर को गोवा में गिरफ्तार किया गया था। वो ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर लोगों से रकम ले रहा था। इसके लिए कई स्कीम चलाई गई थीं। आरोप है कि सभी मुल्जिमों ने तमाम लोगों को गारंटी शुदा रिटर्न का वादा किया। सबूत के तौर पर लोगों को 100 रुपए के स्टांप पेपर पर लिखकर दिया, लेकिन लोगों को जब जून 2024 से रिटर्न नहीं मिला, तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। असम सरकार की सिफारिश पर इस मामले में सीबीआई ने जांच शुरू की थी।
