हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और राहुल गांधी को झटका
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के साथ ही कांग्रेस के लिए फिर एक बुरी खबर आ गई है। हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में भी कांग्रेस को झटका लगा है। खबर लिखे जाने तक दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार पीछे चल रहे थे। कांग्रेस के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव में ये लगातार तीसरी हार भी है। दिल्ली विधानसभा के पिछले दो चुनाव में भी कांग्रेस का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो गया था। कांग्रेस की दिल्ली में हार से राहुल गांधी को भी झटका लगना तय है। साथ ही ये साफ हो गया है कि दिल्ली की जनता के दिलों से कांग्रेस उतर चुकी है।
अगर साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव की बात करें, तो कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। उस साल आम आदमी पार्टी ने 62 सीट पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी ने 8 सीट हासिल की थी। कांग्रेस को 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी। इससे पहले 2015 में भी कांग्रेस का दिल्ली में यही हाल हुआ था। साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 67 सीट जीत ली थी। उस साल बीजेपी को सिर्फ 3 सीट पर जीत मिली थी। वहीं, दिल्ली के वोटरों ने कांग्रेस को पूरी तरह नकारते हुए एक सीट भी नहीं दी थी। इस बार कांग्रेस को उम्मीद थी कि वो अरविंद केजरीवाल को सत्ता से हटाकर खुद दिल्ली में काबिज होगी, लेकिन उसका ये ख्वाब अधूरा रह गया।
इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव की बात करें, तो कांग्रेस ने प्रचार का काम देरी से शुरू किया था। राहुल गांधी बीमार पड़ गए थे और काफी दिन बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार में उतरे। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी देर से प्रचार किया। हालांकि, कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल और बीजेपी की तरह दिल्ली की जनता के लिए मुफ्त की योजनाओं के वादे किए, लेकिन जनता ने कांग्रेस पर भरोसा नहीं जताया। अब दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद देखना होगा कि कांग्रेस का आलाकमान किस तरह का फैसला लेता है। वैसे, दिल्ली
