April 17, 2026

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डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से भारत को नुकसान न होने देने के लिए मोदी सरकार ने कसी कमर, बड़ा कदम उठाने के आसार

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका देश भारत समेत कई मुल्कों से आयात होने वाली चीजों पर 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा। इससे भारत में तमाम लोग चिंता जता रहे हैं। इस बीच, हिंदी अखबार दैनिक हिंदुस्तान ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि अमेरिका के टैरिफ का तोड़ निकालने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है। इसके तहत वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 3 मार्च से ही अमेरिका में हैं। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पीयूष गोयल ने अमेरिका में वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक और वहां के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात कर भारत और अमेरिका के बीच कारोबार पर चर्चा की है। इसके अलावा मोदी सरकार बड़े कदम उठा सकती है।

अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रोडमैप तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा भारत और अमेरिका टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं पर भी चर्चा कर मसले का हल निकालने की कोशिश में हैं। वहीं, कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि टैरिफ से बचने के लिए भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए भी हो सकता है। अगर एफटीए होता है, तो भारत और अमेरिका एक-दूसरे के यहां से आयात होने वाली चीजों पर टैरिफ घटाने या हटाने पर फैसला ले सकते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत से अमेरिका को जो निर्यात होता है, उसका जीडीपी में सिर्फ 2.2 फीसदी ही हिस्सा है। ऐसे में अगर ट्रंप प्रशासन भारत पर टैरिफ लगाता भी है, तो भी इसका ज्यादा असर शायद न हो। आंकड़ों के मुताबिक एशिया में ट्रंप के टैरिफ प्लान का सबसे ज्यादा असर वियतनाम पर होगा। वियतनाम से अमेरिका को जो भी निर्यात किया जाता है, वो उसकी जीडीपी का करीब 25 फीसदी है।

जानकारी के मुताबिक भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 8 मार्च तक अमेरिका में वहां की सरकार से व्यापार पर बातचीत करेंगे। इससे कोई रास्ता निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस रेसिप्रोकल टैरिफ की बात कही है, उसे न होने देने के लिए मोदी सरकार जल्दी ही कुछ और उपायों का एलान कर सकती है। खास बात ये भी है कि यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बीते दिनों ही यूरोपियन यूनियन कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स के साथ भारत आई थीं। उर्सुला ने भारत से व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा की थी।