April 24, 2026

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रेप की कोशिश करने वाले आरोपी के परिवार को राहुल गांधी और झारखंड सरकार देगी आर्थिक सहायता, बीजेपी ने उठाया मुद्दा, सियासत गर्म

नई दिल्ली। झारखंड में एक आदिवासी महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश करने वाले अब्दुल नाम के आरोपी को लोगों ने इतना पीटा की उसकी मौत हो गई। वहीं झारखंड सरकार इस घटना को मॉब लिंचिंग बता रही है। प्रदेश सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने मृतक अब्दुल के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने बताया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तरफ से 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसको लेकर सियासत गर्मा गई है। बीजेपी ने झारखंड सरकार, कांग्रेस और राहुल गांधी पर को निशाने पर लिया है।

मंत्री इरफान अंसारी ने अब्दुल के परिजनों से मिलते हुए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। उन्होंने लिखा कि शोक संतप्त माँ को गले लगा करके उनका दुख बांटने का प्रयास किया। जिला प्रशासन को निर्देशित करते हुए दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने का निर्देश दिया है। अपराधी का कोई धर्म नहीं होता, सिर्फ कानून होता है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वहीं झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंत्री की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा है कि दुष्कर्मी के लिए मुआवजा, पीड़िता के लिए मौन, यही है हेमंत सोरेन का झारखंड मॉडल? बोकारो के कडरूखुट्ठा गांव में एक आदिवासी महिला तालाब में स्नान करने गई थी। वहीं गांव में काम कर रहे अब्दुल कलाम ने महिला से छेड़खानी और दुष्कर्म की कोशिश की। महिला के चिल्लाने पर ग्रामीणों वहां जुटे और आरोपी की जमकर पिटाई की, इस दौरान उसकी मौत हो गई।

बीजेपी नेता ने लिखा, घटना दु:खद है, क्योंकि कानून को हाथ में लेना सही नहीं लेकिन उससे भी ज़्यादा शर्मनाक है इसके बाद झारखंड सरकार और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया, जिन्होंने पीड़िता को भूलकर पूरी संवेदना उस व्यक्ति के लिए लुटा दी जो एक आदिवासी महिला का दुष्कर्म करना चाहता था। कांग्रेस विधायक डॉ. इरफान अंसारी ने पूरे मामले को ‘मॉब लिंचिंग’ कहकर मुस्लिम उत्पीड़न की कहानी बना दी। डॉ. इरफान अंसारी जैसे नेता इस मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग देकर आदिवासी समाज के घाव पर नमक छिड़कते हैं, जबकि झारखंड सरकार पूरी तरह वोटबैंक तुष्टिकरण में लिप्त है। झारखंड की सरकार ने एक आदिवासी महिला की चीखों को अनसुना कर दिया, सिर्फ इसलिए कि आरोपी की पहचान उनके ‘वोटबैंक’ से मेल खाती थी।

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