February 16, 2026

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‘विदेश जाने वाले दलों के लिए मोदी सरकार ने कांग्रेस से कोई नाम नहीं मांगे…योग्यता के आधार पर चुनाव हुआ’, किरेन रिजिजू ने किया साफ

नई दिल्ली। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की कारगुजारियों की जानकारी देने के लिए विदेश जाने वाले दल के लिए 4 नाम मांगे और उनमें से सिर्फ 1 को मंजूरी दी। इस पर अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का जवाब आ गया है। अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया है कि सरकार ने कांग्रेस से नाम मांगे थे। किरेन रिजिजू ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता विपक्ष राहुल गांधी को सरकार ने शिष्टाचार के कारण सिर्फ जानकारी दी थी। रिजिजू ने ये भी कहा कि ये जानकारी औपचारिक तौर से भी नहीं दी गई।

किरेन रिजिजू ने कहा कि ये प्रथा कभी नहीं रही है कि विपक्षी पार्टियों से नाम मांगे जाएं। मोदी सरकार में मंत्री रिजिजू ने कहा कि उन लोगों को ही दलों में रखा गया, जिनको उपयुक्त समझा गया। उन्होंने हैरानी जताई कि कांग्रेस की तरफ से शशि थरूर और मनीष तिवारी के नामों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। किरेन रिजिजू ने अखबार से कहा कि थरूर और मनीष तिवारी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभावी आवाज रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरफ से शशि थरूर को विदेश मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष नामित किए एक साल भी नहीं हुआ है। रिजिजू ने कहा कि हमने किसी पार्टी की आंतरिक राजनीति, असुरक्षा और ईर्ष्या के आधार की जगह योग्यता पर नेताओं का चयन किया है। सरकार ने पंजाब से कांग्रेस सांसद अमर सिंह और सलमान खुर्शीद को भी चुना है। इस पर कांग्रेस क्या कहेगी?

इससे पहले जब मोदी सरकार की तरफ से ये जानकारी दी गई थी कि शशि थरूर भी विदेश जाने वाले एक दल का नेतृत्व करेंगे, तो कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि थरूर की जगह कांग्रेस ने सरकार को गौरव गोगोई, आनंद शर्मा, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का नाम भेजा था। अब किरेन रिजिजू की तरफ से इसका खंडन किए जाने के बाद कांग्रेस और मोदी सरकार में नई जंग छिड़ सकती है। खास बात ये भी है कि अगर सरकार ने औपचारिक तौर पर नाम मांगे होंगे, तो इसके लिए बाकायदा कांग्रेस को चिट्ठी भेजी होगी। कांग्रेस कह रही है कि किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से फोन पर बात कर नाम मांगे थे। अहम बात ये भी है कि विभिन्न दलों में विपक्ष के और नेता भी शामिल हैं, लेकिन उनकी पार्टियों ने ये नहीं कहा है कि सरकार ने नाम मांगे।

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