March 30, 2026

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शांति कभी मुफ्त नहीं मिलती, उसे अर्जित करना पड़ता है, ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर एजीएम में बोले गौतम अडाणी

नई दिल्ली। अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने समूह की सालाना आम बैठक (एजीएम) को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत की वैश्विक स्थिति, मिडिल ईस्ट में तनाव समेत तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी। गौतम अडाणी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे बहादुर सैनिक वर्दी में डटकर खड़े रहे। उन्होंने न तो किसी पहचान के लिए और न ही पदक के लिए, बल्कि कर्तव्य की गहरी भावना के लिए ऐसा किया। उनका साहस हमें याद दिलाता है कि शांति कभी मुफ्त नहीं मिलती, इसे अर्जित किया जाता है। हमें सपने देखने, उनको पूरा करने और नेतृत्व करने की स्वतंत्रता उन लोगों के कंधों पर मजबूती से टिकी हुई है जो हमारी रक्षा करते हैं।

गौतम अडाणी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत शांति की भाषा जानता है, लेकिन अगर कोई चुनौती देता है तो उसी भाषा में जवाब देना भी जानता है। उन्होंने कहा कि जब बात अडाणी डिफेंस की आती है, ऑपरेशन सिंदूर ने जब हमें पुकारा,  हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई। हमारे ड्रोन आसमान में सैनिकों की आंख तो बने ही दुश्मनों पर हमला करने की तलवार भी बने। सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा में हमारी एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका रही। हम सुरक्षित क्षेत्रों में काम नहीं करते हैं। हम वहीं काम करते हैं जहां जरूरी है, जहां भारत को हमारी सबसे ज़्यादा जरूरत है।

गौतम अडाणी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत शांति की भाषा जानता है, लेकिन अगर कोई चुनौती देता है तो उसी भाषा में जवाब देना भी जानता है। उन्होंने कहा कि जब बात अडाणी डिफेंस की आती है, ऑपरेशन सिंदूर ने जब हमें पुकारा,  हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई। हमारे ड्रोन आसमान में सैनिकों की आंख तो बने ही दुश्मनों पर हमला करने की तलवार भी बने। सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा में हमारी एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका रही। हम सुरक्षित क्षेत्रों में काम नहीं करते हैं। हम वहीं काम करते हैं जहां जरूरी है, जहां भारत को हमारी सबसे ज़्यादा जरूरत है।

अडाणी बोले, हम अपने सशस्त्र बलों को सलाम करते हैं, साथ ही हम एयर इंडिया फ्लाइट 171 की दुखद दुर्घटना में जान गंवाने वालों के लिए शोक में भी सिर झुकाते हैं। एक पल में कई सपने खामोश हो गए और कई परिवार हमेशा के लिए बदल गए। हमें अपनी कृतज्ञता और अपने दुख दोनों को याद रखना चाहिए कि वास्तव में क्या मायने रखता है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण हैं। इससे यूरोप की एनर्जी और लॉजिस्टिक्स सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है। अमेरिका भी अपनी चुनौतियों से जूझ रहा है, इसके बावजूद भारत मजबूती के साथ सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

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