August 14, 2026

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बिहार में वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के प्रारंभिक चरण में ही 35 लाख से ज्यादा लोगों के नाम कटेंगे, चुनाव आयोग ने बताई वजह

पटना। बिहार में चुनाव आयोग की ओर से वोटरों के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में ही 35 लाख से ज्यादा लोगों के नाम छंटने जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने बताया है कि बिहार में अब तक 88.18 फीसदी यानी 6.6 करोड़ वोटरों ने विशेष पुनरीक्षण का फॉर्म भरकर जमा किया है। बाकी वोटरों का विशेष पुनरीक्षण फॉर्म 25 जुलाई तक जमा कराए जाएंगे। इसके बाद वोटर लिस्ट जारी कर उसमें शामिल नामों पर दावा और आपत्ति ली जाएगी।

चुनाव आयोग ने जो ताजा आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक अभी तक 1.59 फीसदी यानी 12.5 लाख वोटरों की मौत होने की जानकारी मिली है। वहीं, 2.2 फीसदी यानी 17.5 लाख वोटर स्थायी तौर पर बिहार से बाहर जा चुके हैं और अब राज्य में वोट नहीं डालते। इसके अलावा विशेष पुनरीक्षण के प्रारंभिक दौर में पता चला है कि 0.73 फीसदी यानी करीब 5.5 लाख लोग एक से ज्यादा जगह की वोटर लिस्ट में हैं। इन सभी आंकड़ों को देखें, तो करीब 35.5 लाख वोटरों के नाम नई लिस्ट में से हट जाएंगे। इन हटने वाले नामों का आंकड़ा 4.5 फीसदी होगा। चुनाव आयोग के सूत्रों ने पहले ये भी बताया था कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के घुसपैठियों का भी बिहार में वोटर होने का पता चला है। उनके नाम भी वेरिफिकेशन के बाद काटे जाने हैं।

बिहार में इसी साल 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव कराए जाने हैं। ऐसे में 30 सितंबर तक नई वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के काम के बाद अगस्त के महीने में हर वोटर की ओर से जमा दस्तावेज के आधार पर घर-घर जाकर वेरिफिकेशन का काम होगा। जिसके बाद वोटर लिस्ट जारी की जानी है। वहीं, वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई है। इस याचिका पर एक बार सुनवाई हो चुकी है। कोर्ट ने पुनरीक्षण पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन चुनाव आयोग से कहा था कि वो वोटरों के विशेष पुनरीक्षण के दस्तावेजों में आधार और राशन कार्ड को भी शामिल करने पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 जुलाई को है।

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