निमिषा प्रिया की फांसी रुकवाने का भारत ने यमन सरकार से किया था अनुरोध, नहीं मिला आश्वासन, अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी
नई दिल्ली। यमन की जेल में बंद हत्या की दोषी केरल की नर्स निमिषा प्रिया को सजा ए मौत से बचाने की उम्मीदें क्षीण होती नजर आ रही हैं। दरअसल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि निमिषा को बचाने के लिए एक सीमा तक जो किया जा सकता था वो किया गया। यमन सरकार से सजा को टालने के लिए अनुरोध भी किया जा चुका है मगर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। अब निमिषा को बचाने का एकमात्र यही रास्ता है कि अगर पीड़ित परिवार ‘ब्लड मनी’ लेने के लिए हो जाए तो उसकी मौत की सजा माफ हो सकती है। सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल नाम के संगठन की ओर से इस जनहित याचिका को दायर किया था जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
अटॉर्नी जनरल ने यमन की अदालत के द्वारा निमिषा को फांसी की सजा सुनाए जाने पर भारत के सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह दुर्भाग्पूर्ण है लेकिन सरकार के हाथ में बहुत कुछ नहीं है। हमने यमन के शेख से भी बात की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अदालत ने पूछा कि क्या ब्लड मनी पर यमन से बातचीत का प्रयास किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि निमिषा मामले में राजनयिक हस्तक्षेप का सरकार को निर्देश दे ताकि उसे फांसी से बचाया जा सके। निमिषा प्रिया को यमन के नागरिक तलाल अब्दो मेहदी की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है और फांसी की सजा सुनाई गई है।
निमिषा को दो दिन बाद यानी 16 जुलाई को फांसी दी जानी है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि यमन की अदालत ने निमिषा की अर्जी को भले ही खारिज कर दिया है लेकिन ब्लड मनी का रास्ता अभी खुला हुआ है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार राजनियक स्तर से ब्लड मनी के प्रजोपल की बात करे, हम ब्लड मनी देने के लिए भी तैयार हैं। उधर यमन से जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक तलाल अब्दो मेहदी का परिवार ब्लड मनी लेने के लिए राजी नहीं है।
