फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ अभी नहीं होगी रिलीज, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा- जल्दी इस बारे में फैसला करें
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर लगी रोक फिलहाल हटाने से इनकार कर दिया है। उदयपुर फाइल्स के प्रोड्यूसर्स की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस सूर्यकांत ने उदयपुर फाइल्स की रिलीज के बारे में केंद्र सरकार के पैनल को जल्दी फैसला लेने के लिए कहा। दिल्ली हाईकोर्ट में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने उदयपुर फाइल्स की रिलीज रोकने के लिए याचिका दी थी। इस पर सुनवाई कर हाईकोर्ट ने फिल्म के रिलीज पर रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार को सिनेमैटोग्राफी एक्ट के तहत फैसला लेने के लिए कहा था।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि उनके पास ये अधिकार नहीं कि कौन सी फिल्म रिलीज होनी चाहिए और कौन सी नहीं। कोर्ट ने कहा कि ये अधिकार सरकार के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि उसे कन्हैयालाल की हत्या के आरोपियों की दलील भी सुननी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के कहने पर केंद्र सरकार ने उदयपुर फाइल्स मामले में पैनल बनाया है। कोर्ट ने कहा कि पैनल जब फिल्म को देख लेगा, तभी सरकार आगे बढ़ सकती है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि फिलहाल फिल्म की रिलीज पर रोक जारी रहेगी। देखना होगा कि उदयपुर फाइल्स के बारे में केंद्र सरकार दिल्ली हाईकोर्ट में क्या कहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार दिल्ली हाईकोर्ट में कहती है कि उदयपुर फाइल्स में कुछ भी गलत नहीं है, तब अदालत इस पर विचार करेगी। अगर कोई सीन काटना होगा, तो उसे भी देखना होगा। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उदयपुर फाइल्स के कंटेंट के बारे में कुछ नहीं कहा है। उसने याचियों से इतना कहा है कि वो केंद्र सरकार के पास जाएं। दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार के पास फिल्म की रिलीज रोकने का प्रतिवेदन दिया था। सुप्रीम कोर्ट की आज सुनवाई में उदयपुर फाइल्स के प्रोड्यूसर्स ने कहा कि उनकी फिल्म 11 जुलाई को रिलीज होनी थी। उन्होंने ये दलील भी दी कि फिल्म की अब पाइरेसी हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों पर गौर नहीं किया।
