फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ से जुड़ गए ये विवाद, जानिए केंद्र सरकार ने क्या-क्या बदलने की दी है सलाह
नई दिल्ली। फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ 11 जुलाई को रिलीज होनी थी, लेकिन विवाद में घिरने के कारण फिल्म की रिलीज नहीं हो सकी। उदयपुर फाइल्स की रिलीज को रोकने के लिए पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दी गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाई। जिसके खिलाफ उदयपुर फाइल्स के प्रोड्यूसर्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज की मंजूरी न देते हुए फिल्म पर फैसला लेने के लिए केंद्र के सूचना और प्रसारण मंत्रालय को जिम्मा सौंपा। अब आपको बताते हैं कि आखिर फिल्म उदयपुर फाइल्स से कौन से विवाद जुड़े और सूचना और प्रसारण मंत्रालय की कमेटी ने फिल्म में किन बदलावों की सलाह दी है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की कमेटी ने उदयपुर फाइल्स के निर्माता और डायरेक्टर को सलाह दी है कि वो फिल्म के डिस्क्लेमर को बदले। इसके अलावा कुछ क्रेडिट फ्रेम हटाने के लिए भी कहा गया है। कमेटी ने फिल्म उदयपुर फाइल्स में कुछ जगह वॉयस ओवर जोड़ने के लिए भी कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की कमेटी ने फिल्म में किरदार का नाम नूतन शर्मा की जगह कुछ और रखने के लिए भी कहा है। साथ ही सऊदी अरब में इस्तेमाल होने वाली पगड़ी के एआई से बने सीन में बदलाव करने के लिए भी कहा है। केंद्र की कमेटी ने उदयपुर फाइल्स के डायलॉग- मैंने तो वही कहा है जो उनके धर्मग्रंथों में लिखा है, को भी हटाने की सलाह दी है।
इसके अलावा सूचना और प्रसारण मंत्रालय की कमेटी ने उदयपुर फाइल्स में बलूच समुदाय से संबंधित डायलॉग भी हटाने के लिए कहा है। फिल्म में तीन जगह बलूच समुदाय से जुड़े डायलॉग रखे गए थे। फिल्म उदयपुर फाइल्स राजस्थान के उदयपुर शहर में टेलर कन्हैयालाल तेली की हत्या पर बनाई गई है। फिल्म के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने याचिका में कहा है कि उदयपुर फाइल्स की रिलीज से सांप्रदायिक सौहार्द को खतरा है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर मौलाना अरशद मदनी के लिए उदयपुर फाइल्स की स्पेशल स्क्रीनिंग भी रखी गई थी।
