April 18, 2026

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दिल्ली में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में खुद सुनवाई करेंगे सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई, पशु प्रेमियों को जगी उम्मीद

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया था कि दिल्ली के आवारा कुत्तों को 8 हफ्ते के अंदर शेल्टर होम भेजा जाए जिसके बाद से डॉग लवर्स के द्वारा इस फैसले का विरोध किया जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा है कि वो खुद इस मामले की सुनवाई करेंगे। बार एंड बेंच के अनुसार इस मुद्दे को एक अधिवक्ता ने सीजेआई के समक्ष उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के ही द्वारा ही पूर्व में एक आदेश का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि सभी जीवों के प्रति करुणा होनी चाहिए। इसके बाद सीजेआई गवई ने कहा कि बेंच हालांकि पहले ही इस मामले में अपना फैसला सुना चुकी है, लेकिन मैं इस पर गौर करूंगा।

सीजेआई गवई के इस मामले को देखने से अब पशु प्रेमियों में उम्मीद जगी है कि संभवत: कोर्ट के पूर्व के फैसलों को बदल दिया जाए। दरअसल पशु प्रेमियों का कहना है कि अदालत का फैसला अव्यवहारिक है। सुप्रीम कोर्ट के बाहर आज बड़ी संख्या में पशु प्रेमी इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की बेंच ने आवारा कुत्तों के द्वारा लोगों को काटे जाने की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी लावारिस कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर में रखे जाने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉग शेल्टर से कुत्तों को छोड़ा नहीं जाए। साथ ही अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर हेल्पलाइन बनाने का निर्देश दिया ताकि कुत्तों के काटने के सभी मामलों की सूचना दी जा सके। शीर्ष अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि नवजात और छोटे बच्चों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं बहुत गंभीर मामला है और इसके लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, एमसीडी और एनडीएमसी को निर्देश दिया कि कुत्तों के लिए शेल्टर बनाया जाए।

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