भारत ने 3500 किलोमीटर तक मार करने वाली के-4 मिसाइल का किया सफल परीक्षण, 2 टन का परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान की नींद अब और उड़ने जा रही है। भारतीय नौसेना ने मंगलवार को परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विशाखापत्तनम के पास समुद्र में आईएनएस अरिघात से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल को दागा गया। के-4 मिसाइल ने पूरे 3500 किलोमीटर रेंज की दूरी सफलता से हासिल की। के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का बीते साल पानी में डूबे प्लेटफॉर्म से सफल परीक्षण किया गया था। पहली बार इस खतरनाक मिसाइल का भारत ने पनडुब्बी से परीक्षण किया है।
के-4 बैलिस्टिक मिसाइल से चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों के खिलाफ 2 टन का परमाणु हथियार दागा जा सकता है। इस तरह ये पूरे पाकिस्तान और चीन के बड़े हिस्से में तबाही मचाने में मददगार है। इससे पहले भारत ने अपनी पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत से के-15 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। के-15 की मारक दूरी 750 किलोमीटर है। भारत की दूसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात 4 के-4 या 15 के-15 बैलिस्टिक मिसाइल ले जा सकती है। भारतीय नौसेना अब 7000 टन की परमाणु पनडुब्बी बनवा रही है। जिसमें ज्यादा के-4 मिसाइलें रखी जा सकेंगी। अरिहंत और अरिघात छोटी परमाणु पनडुब्बियां हैं।
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस मिसाइल को तैयार किया है। के-4 एसएलबीएम दो स्टेज की सॉलिड फ्यूल वाली मिसाइल है। के-4 मिसाइल के पनडुब्बी से सफल परीक्षण से भारत भी अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के साथ आ गया है। इन सभी देशों के पास परमाणु पनडुब्बी से लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं। भारत भी पनडुब्बी से दागी जाने वाली ऐसी मिसाइलें तैयार कर रहा है, जो 6000 किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी तक मार करने वाली होंगी। परमाणु पनडुब्बी से दागी जा सकने वाली मिसाइलें दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक होती हैं। क्योंकि वे चुपचाप दुश्मन की समुद्री सीमा में जाकर हमला करती हैं। के-4 मिसाइल की रेंज इतनी ज्यादा है कि भारतीय नौसेना अपनी समुद्री सीमा में रहकर ही पाकिस्तान पर कहर बरपा सकती है।
