यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा निरस्त, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोबारा एग्जाम कराने के दिए निर्देश
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अप्रैल 2025 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया है। परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। इसके साथ मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है जल्द से जल्द निष्पक्ष और पारदशी ढंग से भर्ती परीक्षा कराई जाए। प्रदेश में होने वाली समस्त भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए सरकार ने प्रतिबद्धता जताई है।
सरकार के अनुसार इस परीक्षा में धांधली की शिकायत मिलने के बाद प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए थे। यूपी एसटीएफ ने परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों- महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया था। महबूब अली निर्वतमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। उससे रिजाइन ले लिया गया। उसने पूछताछ में यह स्वीकार किया कि उसके द्वारा मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाले गए थे। उसने कई अभ्यर्थियों को विभिन्न माध्यमों से पैसे लेकर यह प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। अभियुक्त महबूब अली की स्वीकारोक्ति की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई।
इसी संबंध में आगे की जांच में गिरफ्तार अभियुक्तों तथा उनसे संबंधित अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का डाटा विश्लेषण और गुप्त सूचनाओं के आधार पर कुछ अन्य लोगों के नाम और मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली। इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा मांगा गया। डाटा के मिलान में यह तथ्य सामने आया कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2025 की शुचिता भंग हुई है। इसी के चलते परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया गया।
